चाची का अकेलापन

हैलो डियर रीडर्स । मै नील २६ साल का लड़का भोपाल में रहता हूँ। मैं एम कोम फ़ाइनल इयर का स्टुडेंट हूं। अभी मैं अपने चाचा के यहां रह रहा हूं। मेरे चाचा मुझसे सिर्फ़ ९ साल बड़े हैं और उनकी शादी ४.५ साल पहले हुई थी। मेरी चाची बहुत खूबसूरत है। ५.४ लम्बा कद खूबसूरत होंठ जूस से भरे हुए, हिरनी जैसी आंखें, पतली सी कमर और बड़े गोल मटोल बूब्स, हैवी हिप, शी लुक लाइक ए ब्युटी क्वीन। उसके बूब्स का साइज़ है ३८ /२७ /३६ ।

एक दिन मेरे चाचा घर वापस आये तो काफ़ी परेशान थे। हमने (मैं और चाची) उनसे पूछा तो कहने लगे कि मुझे करोबार में बहुत नुकसान हुआ है और कुछ भी बाकी नहीं बचा। फिर चाचा ने अपना सब कुछ बेंच दिया और बचने वाले रुपयों से मुम्बई चले गये और मेरे घर वालों से कहा कि नील को इधर ही चाची के पास रहने दें। तो मैं चाची के साथ रहने लगा।

मैं रोज़ कोलेज़ जाता और वापस घर आता तो चाची मुझे खाना देती और फिर मैं खाना खा कर सो जाता। और शाम को उठ कर स्टडी के लिये चला जाता और फिर रात को वापस आता। एक दिन की बात है, मैं कोलेज़ गया तो कोलेज़ बंद था। क्योंकि कोलेज़ में झगड़ा हो गया था, जिसकी वजह से कोलेज़ में स्ट्राइक थी। तो मैं वापस घर आ गया।

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मैं अपने कमरे मैं अपनी चीज़ें रख कर चाची के रूम की तरफ़ आया कि चाची को बता दूं कि मैं कोलेज़ से आ गया हूं। अभी मैं कमरे के दरवाज़े पर पहुंचा ही था कि मैंने चाची को देख लिया। वो अपने कपड़े बदल रही थी। मैं वापस होने लगा तो मेरा दिल चाहा कि मैं चाची को देखता ही रहूं, तो मैं वापस आ कर दरवाज़े की ओट से चाची को देखने लगा। चाची ने पहले अपना सूट उतारा फिर ब्रा भी उतार दी और शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी।

उफ़ कितना खूबसूरत बदन है चाची का! क्या खूबसूरत बूब्स हैं और क्या पतली कमर है!

मैं देखता ही रह गया और मेरा लंड खड़ा हो गया। इससे पहले मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था। मगर आज अचानक ही मेरे दिल में ख्वाहिश जागी, क्यों न मैं चाची की चूत का मज़ा लूं। सामने चाची नंगी खड़ी थी और मैं उसको देख रहा था।

मैं उसको देखता ही रहा, काफ़ी देर तक! कभी चाची खुद को आगे से देखती, कभी साइड से! शायद वो अपनी फ़िटनेस देख रही थी। फिर चाची अपने बूब्स को मसलने लगी और मैं अपने लंड को मसलने लगा।

फिर वापस अपने कमरे में आ गया और कुछ देर के बाद मैं दोबारा चाची के कमरे में गया। उसको बताया के मेरा कोलेज़ बंद है, इसलिये मैं वापस आ गया हूं।

मैंने महसूस किया कि चाची की नज़रें आज कुछ बदली हुई हैं और आज उसने मुझे अजीब सी नज़रों से देखा। फिर कहने लगी कि अच्छा ठीक है।

रात को खाना खने के बाद मैं टीवी देखने लगा और फिर रात को काफ़ी देर तक टीवी देखता रहा। चाची के बारे में सोचता रहा, चाची का जिस्म मेरी नज़रों में घूम रहा था। फिर मैं सो गया।

अचानक रात को मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे कमरे में आया है। मैंने उठ कर बेड लैम्प जलाया, तो देखा कि चाची है। तो मैंने उससे पूछा – क्या बात है?

तो वो कहने लगी – मुझे अकेले में डर लग रहा है। मैं तुम्हारे पास सो जाऊं?

तो मैंने कहा – हां, आप इधर बेड पर सो जाओ। मैं सोफ़े पर सो जाता हूं। और मैं बेड से उठ कर खड़ा हो गया।

तो वो कहने लगी – कोई बात नहीं। तुम भी इधर ही बेड पर सो जाओ। क्योंकि यह डबल बेड है और हम दोनो ही इस पर सो सकते हैं।

तो मैं बेड की दोसरी साइड पर आ कर लेट गया। अब मेरी नींद उड़ गई थी और मैं सोच रहा था कि कब चाची गहरी नींद सो जाये और मैं चाची के जिस्म को सही तरह देख सकूं।

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काफ़ी देर मैंने इन्तज़ार किया, १ घंटे बाद मैंने चाची के जिस्म पर हाथ लगाया तो वो गहरी नींद में थी। उसको कुछ पता नहीं लगा। तो मैंने हाथ को फेरना चालू कर दिया।

आहिस्ता आहिस्ता, मैंने हाथ को चाची के बूब्स की ब्रा खोल दिये और फिर मैंने चाची का एक बूब हाथ में ले लिया! वो इतना बड़ा था कि मेरे हाथ में नहीं आया। फिर मैंने आहिस्ता से चाची की कमीज़ के बटन को खोला और अब चाची के बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे।

मैंने उसके मम्मे को हाथ लगाया तो वो टाइट हो गया। फिर मैं आहिस्ता से उस पर अपने होंठ रख दिये। मैंने उसकी चूचियों को मुंह में ले कर आहिस्ता आहिस्ता चूसने लगा।

फिर मेरे दिल में आया कि मैं चाची के रस भरे होंठों पर किस करूं! जब मैंने होंठों पर किस करने के लिये मुंह उठाया, तो मुझे लगा कि जैसे मैं बर्फ़ का हो गया हूं। क्योंकि चाची की आंखें खुली थी।

मैं चाची को जगता देख कर, इस तरह हो गया जैसे मुझे सांप सूंघ गया हो। मेरे हाथों के तोते तो क्या चिड़िया कौव्वे तक भी उड़ गये हों।

चाची ने मुझ को कहा – यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने शरम से सर झुका लिया। तो चाची ने मेरी थोड़ी से पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के सामने किया और कहने लगी – जब तुम छुप छुप कर मुझे देख रहे थे, तब भी मैंने तुम्हें देख लिया था। यह तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारे चाचा को बता दूंगी।

तो मैं बहुत डर गया और चाची से कहा – आप चाचा को न बताना, प्लीज़। मैं दोबारा ऐसी हरकत नहीं करूंगा।

तो वो कहने लगी – एक शर्त पर तुम्हारे चाचा को नहीं बताऊंगी।

तो मैंने कहा – क्या शर्त है? मुझे आपकी हर शर्त मंज़ूर है।

तो चाची कहने लगी – जो तुम कर रहे थे, दोबारा करो!

मैंने कहा – नहीं यह बात ठीक नहीं है, चाची। (वैसे मैं दिल में बहुत खुश हो रहा था।)

तो चाची ने कहा – ठीक है, मैं चाचा को बता दूंगी और तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त मंज़ूर है।

तो मैंने चाची से कहा – ठीक है और चाची को बाहों में ले लिया। और उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा।

तो चाची ने मुझे कहा – तुम्हें तो किस करनी भी नहीं आती!

फिर चाची ने मुझे किस किया। तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और मैं ने चाची को ज़ोर से दबाया।

फिर चाची ने मुझे कहा – मेरे कपड़े उतारो।

जब मैंने चाची की कमीज़ उतारी, तो चाची के मम्मे पकड़ लिये और उनको मसलने लगा। चाची को भी मज़ा आने लगा। तो वो कहने लगी – आआहह्ह ज़ोर से चूस ले। आज मेरे मम्मों को और बुझा दे मेरी प्यास।

फिर चाची ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और मेरी छाती पर किस करने लगी। मुझे भी मज़ा आने लगा। फिर चाची ने मेरा ट्राउज़र भी उतार दिया और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगी। उसने मेरा लंड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी। – आआहह्ह कितना बड़ा है, तेरा लंड गुड्डो! यह तो बहुत बड़ा है रे…

अब मैं भी काफ़ी इज़ी महसूस कर रहा था। क्योंकि अब बात खुल गई थी। फिर मैं चाची के पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लग गया। उसके मम्मों पर उसकी चूत पर उसकी गांड पर। मैंने एक उंगली डाली तो वो चीख उठी – ओय उल्लू के पट्ठे क्या कर रहा है?

फिर मैंने चाची को कहा – मुझे गाइड करो।

तो उसने मुझे कहा – मैं उसकी टांगों के दरमियान आ जाऊं और उसकी टांगों को उठा कर कंधों पर रख लूं।

तो मैंने यह ही किया।

फिर उसने कहा – अब अपने लंड को मेरी चूत में डालो।

फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा, तो उसने नीचे से एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा पूरे का पूरा लंड उसने अपनी चूत में ले लिया और फिर कहा कि अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में अंदर डालूं और बाहर करूं।

तो मैं लंड को इन और आउट करने लगा। काफ़ी देर में चाची को इसी तरह चोदा।

फिर चाची ने मुझे कहा – मैं थक गई हूं। अब दूसरी तरह करो और फिर चाची ने डोगी स्टायल बना लिया। मैं चाची को डोगी स्टायल में चोदने लगा। और चोदते चोदते मैंने चाची की चूत से लंड बाहर निकाल लिया और उसको चाची की गांड में डाल दिया।

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जब मैंने गांड में डाला, तो चाची चिल्लाने लगी – अबे बहनचोद निकाल मेरी गांड से मुझे बहुत दर्द हो रहा है!!! अबे गांड से निकाल और उसको फुद्दी में डाल।

मैंने कहा – आज गांड चोदने का मज़ा भी ले लो।

तो वो कहने लगी – मेरी गांड तो कभी तेरे चाचा ने भी नहीं ली।

तो मैंने कहा – मुझे तो तुम्हारी गांड लेनी है।

तो वो कहने लगी – मुझे बहुत दर्द हो रहा। क्या तुम आराम से नहीं कर सकते! आआअहह्हह आराम से करो वर्ना मेरी गांड फट जायेगी हरामी। आराम से अबे मादर चोद कोई तेरी गांड में अपना लंड डाले, तो तुझे पता चले कि कैसे दर्द होती है। ओय तुझे मैं कह रही हूं, आराम!

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फिर उसने मुझसे अपना छुड़ा लिया और मेरा लंड उसकी गांड से बाहर निकल गया। वो बैठ कर अपनी गांड को दबाने लगी। फिर मुझे कहने लगी – तुम तो बिल्कुल ही वहशी हो। तुम्हें किसी के दर्द का कुछ ख्याल ही नहीं है। मुझ इतना दर्द उस वक्त नहीं हुआ, जब मैं पहली बार चुदी थी। जितना दर्द मुझे आज हुआ है!

फिर कुछ देर बाद, मैंने दोबारा चाची को चोदने लगा। सारी रात हमने मज़े लिये और मैंने चाची को हर तरह से चोदा। कभी डोगी स्टायल में, तो कभी घोड़ी बना कर, कभी सीधा लिटा कर, तो कभी उसको अपने लंड पर बिठा कर! हर तरह से मैंने उसको चोदा।

मैंने और चाची ने खूब चुदाई की और करवाई। अब हम रोज़ ही मज़े करते हैं, लेकिन अब मुझे चाची को चोद कर पहले जैसा मज़ा नहीं आता। क्यों अब उसकी चूत खुली हो गई है और जो मज़ा तंग चूत में है, वो खुली चूत में कहां! आप का क्या ख्याल है दोस्तों? आप अपनी राय मुझे जरुर बतायें।

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