भाई और बहन की आपस में चुदाई – भाग 1

आज बहुत दिन बाद मैं कोई कहानी लिखने जा रही हूँ, मैं असल में बाहर चली गई थी.

आप लोगों के बहुत सारे मेल मिले थे, जिनमें मेरी कहानियों को काफ़ी पसंद किया गया है. जिसका मैं आप सबका खुले दिल और फ़ैली चूत के साथ शुक्रिया अदा करती हूँ. लड़कियों की चूत के लिये दुआ करुंगी कि उनको भी कोई चोदने वाला जल्दी से मिल जाए.

और लड़के तो साले होते ही हरामी हैं, कहीं और नहीं मिली तो घर में ही शुरु हो गये.

अपनी सेक्स लाइफ को बनाये सुरक्षित, रखे अपने लंड और चुत की सफाई इनसे!

मुझे लड़कों से एक शिकायत है कि वो सब ही मुझे चोदना चाहते हैं! अरे यार… मुझे चुदवाने से कोई इंकार नहीं है पर अब मैं बैठी यू पी में… और आप लोग पता नहीं कहाँ कहाँ बैठे हो, अब भला किसी का लंड इतना बड़ा तो होगा नहीं कि वहाँ बैठे बैठे मेरी चूत को चोद डाले…

तो प्लीज़ मुझसे हर तरह की बात करें, पर मुझे चोदने की बात न करें क्योंकि यह हो नहीं सकता.

अगर आपने मेरी पहली कहानी नहीं पढ़ी तो उसे जरूर पढ़ लेना – अब्बु और भाई – Part 1

हाँ तो अब मैं आप सबको बताती हूँ कि मैं आगरा अपनी मुमानी के घर गई थी, करीब 5 साल बाद अपनी अम्मी और भाई के साथ…

वहाँ मुझे बहुत अच्छा लगा, इतने साल बाद जाने के बाद वहाँ सभी लोग बहुत प्यार से मिल रहे थे. हम लोगों ने खूब मौज मस्ती की पर हफ़्ते भर बाद ही, मुझमें चुदाने के कीड़े रेंगने लगे क्योंकि वहा तो लगभग रोज़ ही चूत में लंड खाती थी. शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब मैं न चुदवाऊँ, पर यहाँ तो चुदाई क्या साला किसी से चूची मसलवाने को तरस गई.

हालांकि मेरी मुमानी की दो लड़कियाँ मेरी हमउम्र थी, पर वो बहुत सीधी सादी थी. कम से कम उनके बर्ताव से तो यही ज़ाहिर होता था कि बच्चियाँ अभी बहुत नादान हैं. बेचारी अपनी जवानी के बारे में भी शायद नहीं जानती थी जबकि वो दोनों बला की खूबसूरत हैं! जिस्म का रंग दूध जैसा गोरा, भरी भरी जांघें, लाल-लाल गाल और चूचियाँ तो कयामत थी! कसम से उनकी चूची बला की खूबसूरत थी! उनमें छोटी वाली अभी स्कर्ट टॉप ही पहना करती थी.

मैं अकसर सोचती कि साली इतनी खूबसूरत हैं दोनों, फ़िर भी इतनी सीधी साधी हैं.

एक दिन की बात है, मैं छत पर नहा कर बाल सुखा रही थी कि तभी कोई मेरे पीछे से मेरी गांड में लौड़ा अड़ा कर मेरी चूचियों को दबाने लगा. मेरी तो बांछें खिल गई, सोचा किसी को तो तरस आया मेरी जवानी पे!

जब घूम कर देखा तो भाई जान थे.

मैंने कहा – हटिये भी भाई! भला यह भी कोई जगह है प्यार करने की? कोई देख लेगा तो शामत आ जायेगी.

तब भाई ने उसी अवस्था में खड़े खड़े मेरी चूचियाँ दबाते हुए कहा – हाँ यार, यह तो है! साला यहाँ बाकी सब तो ठीक है पर लंड को बहुत तरसना पड़ता है. साला यहाँ घर ऐसा महल तो है नहीं कि जब जी चाहा बिस्तर पर पटक कर चोद लिया! यार तुम न हुई तो अम्मी की पुरानी भोसड़ी में ही लंड डाल लिया, नहीं तो तुम्हें ही चोद लिया पर साला यहाँ तो बड़ी दिक्कत है. अब हफ़्ता भर हो गया, साला लंड को कोई चूत नसीब नहीं हुई.

उनके चूची दबाने से मैं अब तक गर्म हो चुकी थी, तब मैंने कहा – भाई, अब आप मेरी चूची न दबायें क्योंकि इस तरह तो आग और भड़क रही है. जब चोद नहीं पायेंगे तब गुसल खाने में जाकर मुझे भी उंगली करनी पड़ेगी और आपको भी मुठ मारना पड़ेगा.

तब भाई ने कहा – यार, अब इतने दिन बाद मौका मिला है तो बिना चोदे तो नहीं छोडूंगा, चाहे जो हो जाए!

और यह कह कर मेरा तौलिया खोलने लगे.

मगर मैंने कहा – हाय भाई, ऐसा न कीजिये, कहीं यहाँ किसी ने देख लिया तो बड़ी बदनामी हो जायेगी! चुदवाने का मन तो मेरा भी है पर क्या करें, मज़बूरी है!

तब भाई ने कहा – अच्छा तुम नहीं मान रही तो मेरा लंड बस मुंह से चूस कर ही हल्का कर दो, मैं सब्र कर लूंगा.

मैंने कहा – भाई, आप मान नहीं रहे, कहीं कोई उलटी सीधी बात हो गई तो क्या होगा?

मगर भाई न माने और मुझे एक तरफ़ दीवार की आड़ में ले गये और अपनी पैंट की जिप खोल कर मुझे घुटनो के बल फ़र्श पर बैठा दिया और मेरे हाथ में लंड पकड़ा कर बोले – प्यारी बहना चूस कर खलास कर दो लंड को!

तब मैंने कहा – भाई, अभी तो खड़ा भी नहीं हुआ, बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और वक्त भी लगेगा. आप मान नहीं रहे.

तब वो मेरी चूची को तौलिये के ऊपर से दबाते हुए बोले – साली नाटक न कर बहन की लौड़ी! एक तो चोदने को नहीं मिल रहा, ऊपर से तू बातें चोद रही है! चल जल्दी से चूस कर खड़ा कर लंड को!

तब मुझे भी गुस्सा आ गया, मैंने कहा – बड़ी बहादुरी दिखा रहे हो? लो अब मैं भी बहादुरी दिखाती हूँ.

ये कह कर मैंने अपनी टोवल उतार कर फ़ेंक दी और झट से भाई का लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी.

भाई ने जब देखा कि मैंने टोवल उतार कर फ़ेंक दी तो उसकी भी गांड फ़टी – आरज़ू, तुमने ये क्या किया? कहीं किसी ने देख लिया तो क्या होगा?

तब मैंने कहा – अभी मैं कह रही थी, तो मेरी गांड में घुस गये अब काहे गांड फ़टी जा रही है. चोदो जो होगा देखा जायेगा, ज्यादा से ज्यादा मुमानी की लड़कियाँ या मुमानी ही तो आयेंगी ऊपर सम्भाल लूंगी मैं…

उनको तब भाई ने कहा – अगर मामु जान आ गये तो क्या होगा?

तब मैंने कहा – यार लड़कियों और अम्मा को तुम सम्भालना और अगर मामु जान आये तो वो मेरी चूत और नंगी चूचियाँ देख कर ही धरशायी हो जायेंगे!

उसके बाद मैंने भाई से कहा – भाई, आप जल्दी से मेरी चूत को चाट कर गर्म कर दो और आपका लंड मैं चूस कर तैयार करती हूं.

तब भाई जल्दी से मेरी चूत की तरफ़ मुंह करके लेट गये और अपने लंड को मेरे मुंह के पास ले आये और तब मैं जल्दी से उनका लंड मुंह में भर लिया और चूसने लगी. भाई भी चटाक चटाक मेरी बुर को चटखारे के साथ चूस रहे थे.

भाई का लंड जल्दी ही खड़ा हो कर तन गया, मगर मैं अभी पूरी तरह से गर्म नहीं हुई थी.

तब भाई ने कहा – आरज़ू, तुम जल्दी से चौपाया बन जाओ, मैं पीछे से डालता हूं आज तुम्हारी चूत में!

मैंने कहा – भाई, अभी मैं पूरी तरह गर्म नहीं हूं, आप ऐसा कीजिये कि अपनी टांगें फ़ैला लीजिये, मैं आज झूला आसन से चुदाऊँगी!

भाई अपनी टांगें सीधी फ़ैला कर बैठ गये और मैं अपनी चूत फ़ैला कर उनकी टांगों के बीच खड़ी हो गई और पहले भाई से कहा – भाई, एक किस मेरी बुर पर कीजिये, फ़िर सम्भाल कर बैठ जाइये मैं अचानक अपनी चूत आपके लंड पर गिराऊँगी.

भाई ने मेरी चूत पर किस तो करा मगर फ़िर बोले – रानी, अगर सेंटर आउट हो गया तो मेरी भी गांड फ़टेगी और तुम्हारी भी इसलिये भलाई इसी में है कि चुपचाप मेरे लौड़े पर अपनी चूत रख कर बैठ जाओ!

मगर मुझे तो ज़िद चढ़ गई, मैंने कहा – जैसा कहती हूं करो!

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तब भाई सम्भल कर बैठ गये और मैं धड़ से उनके लंड पर बैठने को हुई कि उनका लंड पीछे चला गया और मेरी गांड के नीचे दब गया. भाई के मुंह से एक दर्द भरी चीख निकल गई – आआअह मार डाला कुतिया… सालीईई मैं पहले ही कह रहा था, तू नहीं कर पायेगी मगर तू तो आज मेरी गांड फ़ाड़ने पर अमादा है. हट जा, ज़रा सहलाने दे लंड को, बहुत ज़ोर से दबा है! एक तो तेरे चूतड़ इतने भारी हैं, ऊपर से 9 मन का बोझ!

मुझे भाई की हालत देख कर हंसी आ गई और मैंने कहा – एक बार निशाना चूक गया तो गांड फ़ट गई? अरे मेरी चूत की तुम और अब्बु मिलकर कितनी बार कुटाई कर चुके हो?

तब भाई थोड़ा नोर्मल हो गये और मैं फ़िर से खड़ी हो गई, मुझे खड़ा होते देख कर भाई की गांड फ़ट गई, बोले – क्या इरादा है अब तेरा?

मैंने कहा – भाई वन्स मोर! कोशिश करो प्लीज!

तब भाई ने कहा – बहुत बड़ी निशानची बन रही है? याद रख, तुझे चांस तो दे रहा हूं, अगर इस बार निशाना चूका तो किसी कुत्ते से तेरी गांड मरवाऊँगा!

हम दोनों अपनी वासना में इतने गुम हो गये थे कि भूल ही गये थे कि यह घर मुमानी का है और हम लोग छत पे हैं, मुझे ज़रा आहट हुई तो देखा कि खाला की छोटी लड़की अफ़रोज़ दरवाज़े की आड़ लेकर खड़ी है और पता नहीं कब से हम दोनों की बातें सुन रही थी और नज़ारा देख कर मजा ले रही थी.

मैं उसे देख कर थोड़ा सकपका गई और सम्भलते हुए भाई की गोद में बैठ कर उसके कान में धीरे से कहा – भाई, अफ़रोज़ पता नहीं, कितनी देर से हम लोगों को देख रही है और हमारी बातें भी सुन ली हैं उसने!

तब तो भाई भी घबरा गया लेकिन भाई ने धीरे से कहा – अब तो देख ही लिया है, मेरे ख्याल से ये ज्यादा कुछ नहीं करेगी, बस हम लोगों की चुदाई देखेगी, इसमें हमारा ही फ़ायदा है!

मैंने कहा – भाई, अगर मुमानी से कह दिया इसने… तब क्या होगा? मामु और मुमानी क्या सोचेंगी कि हम लोग आपस में चोदा चोदी करते हैं?

तब भाई ने कहा – ऐसा कुछ नहीं होगा, अब हमें इसकी प्यास भड़कानी है, इसको इस बात का एहसास करा देना है कि चुदाई में बहुत मजा आता है. जवान तो ये भी है साली कितनी देर तक बरदाश्त करेगी चूत की प्यास को! और फ़िर जब मेरा औज़ार तुम्हारी चूत में घुसते हुए देखेगी, तब साली खुद ही उंगली करेगी अपनी बुर में और कसम से मैं तो पहले दिन से इन दोनों बहनों को चोदने के चक्कर में हूं. मगर हाथ ही नहीं धरने देती हैं साली दोनों बहनें… पर आज यकीनन इसकी चूत में चुदाई का कीड़ा रेंगने लगेगा. बस तुम इस तरह से दिखाना कि तुमको बहुत मजा आ रहा है, फ़िर देखो कैसे लाइन पर आती है.

उस दिन छत पर जब हम दोनों चुदायी लीला कर रहे थे, तब ही मेरी मुमानी की बड़ी लड़की अफ़रोज़ छत पर आ गयी थी और चुपके से छुप कर हमारी बातें सुन रही थी और देख भी रही थी.

भाई ने मुझे बांहों में भर लिया और अपना तना हुआ लंड मेरी चूत से रगड़ने लगे. मैं अफ़रोज़ को दिखाने के लिये मादक सिसकियां निकाल रही थी मुंह से – आआययीई … भाई जान, बहुत गुदगुदी हो रही है … आआह्हह प्लीज़ … अब घुसा दीजिये अपना लंड मेरी चूत में!

और मैंने अपने दोनों हाथ से भाई का लंड पकड़ लिया और मसलने लगी.

भाई भी अफ़रोज़ को दिखाने के लिये ज़ोर ज़ोर से कराह रहे थे, ताकि इसकी चूत में भी खुजली होने लगे और वो भाई की टांगों के नीचे खुद ब खुद चूत फ़ैला कर पसर जाये. अब उन्होंने अपने हाथ से मेरी चूत को फ़ैलाया और अपने लौड़े का मुहाना मेरी चूत पर रख कर मुझसे धीरे से बोले देखो – इस तरह की एक्टिंग करना कि अफ़रोज़ पूरी तरह से चुदासी हो जाये! पता है कि तुम्हारी चूत ढीली हो चुकी है मगर फ़िर भी नाटक करना कुंवारी होने का!

इतना कहकर भाई ने जरा सा लंड ही अंदर ठेला था कि मैं चिल्ला पड़ी – आआह्हह भाईईजान … बहुत दर्द कर रहा है प्लीज़ आहिस्ता आहिस्ता कीजिये आराम से!

भाई ने अपने होठों में मेरी चूची भर ली और चूसने लगे और एक धक्का और मारा. इस बार उनका करीब 5″ लंड अंदर समा गया. मैंने उनकी कमर जोर से पकड़ ली और अपनी दोनों टांगें उनकी पीठ से किसी कैंची की तरह फ़ंसा ली और अपने चूतड़ को ऊपर की तरफ़ उछालने लगी – आआआ आह्हह्ह ह्ह भाई … बहुत मज़ा आ रहा है. अब तो घुसा दीजिये अपना पूरा बाकी का बचा हुआ लंड भी! अययीईई आअह्हह … कसम से जवानी में चुदवाने का मज़ा ही अलग है!

ये सब मैं अफ़रोज़ को सुनाने के लिये कह रही थी, जिसे वो सुन भी रही थी और बहुत मज़े लेकर हम दोनों को देख भी रही थी. उसे नहीं पता था कि हम लोग उसे देख चुके हैं.

तब ही भाई ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में जोरदार धक्के के साथ घुसेड़ दिया. मैं आआय यययीईई इस्सस्स इस्सस्स अम्मी माआअर्रर डालाआआअ भाईईइ बहुत दर्द हो रहा है. आप ज़रा भी तरस नहीं खाते अपनी बहन पर … पूरे जल्लाद बन जाते हैं. चोदते वक्त कहीं इतनी जोर से भी धक्का मारा जाता है?

और तब ही भाई मेरी निप्पल को दांत से दबाते हुए बहुत ही आराम से धक्के मारने लगे. अब मैं ऊऊओफ़्फ़ ऊऊओफ़्फ़ फ़्फ़फ़ कर रही थी और अब इस तरह दर्शा रही थी कि मुझे बहुत मस्ती मिल रही है.

“आअहाआ भाई … बहुत मज़ा आ रहा है. थोड़ा और जोर से धक्का मारो ना प्लीज़! तुम्हें अपनी बहन की कसम है … आज सारी ताकत झोंक देना मेरी चूत में! ज़रा भी तरस ना खाना! साली बहुत कुलबुलाती रहती है.”

फ़िर तो भाई ने धक्कों की झड़ी लगा दी, फ़चा-फ़च की आवाज़ निकल रही थी और मैं भी अपने चूतड़ को उछाल रही थी.

तब ही भाई का लंड झड़ने के करीब आया और भाई ने कहा – आरज़ू बहन, अब मैं झड़ने वाला हूँ. तुम्हारी क्या पोजिशन है?

मैंने कहा – क्या बात है, आज आप मुझसे पहले डिस्चार्ज हो रहे हैं? वरना तो मेरा पानी दो बार निकलता था, तब कहीं आप झड़ते थे?

भाई ने कहा – बहुत दिन बाद आज चुदायी कर रहा हूँ ना, इसलिये ऐसा हो रहा है. क्या बतायें, वहां घर की बात ही और थी यहां तो साला मौका ही नहीं मिलता है.

तब मैंने कहा – यहां किसका डर है?

भाई ने कहा – कहीं मुम्मानी की लड़कियां न देख लें! या मामुजान को पता न चल जाये.

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अब हम लोग काम की बात पर आये थे. तब मैंने भाई से कहा – भाई अफ़रोज़ भी तो जवान है, उसका भी तो मन करता होगा, अपनी जवानी का मज़ा लेने का! रही मुमानी की बात … तो उनको तो मैं अकसर मामुजान से चुदाते हुए देखती हूँ. वो अब भी टांगें उठा उठा कर बहुत मज़े से चुदवाती हैं मामुजान से … और मामु जान भी कम नहीं हैं बहुत दम है उनके लौड़े में … इस उमर में भी थका डालते हैं मुमानी को! उस दिन तो मैंने देखा कि वो मुमानी की गांड मार रहे थे और मुमानी चिल्ला रही थी.

भाई ने बड़ी हैरत से पूछा – अच्छा, मामूजान भी गांड मारते हैं? शकल से तो बहुत शरीफ़ नज़र आते हैं.

तब मैंने कहा – भाई, पता है मैंने मुमानी की बातें भी सुनी थी, वो कह रही थी मामु से कि अब आप में पहले की तरह मज़बूती नहीं रह गयी. पहले तो सारी रात ही पड़े रहते थे मेरी ओखली में अपना मूसल डाले … अब पता नहीं क्या हो गया है आपको. तब मामू ने कहा ‘क्या बतायें बेगम, अब बच्चियां जवान हो गयी हैं, डर लगा रहता है कहीं हम दोनों की चुदायी देख कर बहक ना जायें. तब मुमानी ने कहा ‘अरे वो अपने रूम में सो रही हैं तुम उनकी फ़िकर क्यूं करते हो, जम कर मारो आज मेरी गांड!’ और फ़िर मामू ने बहुत जोरदार गांड चोदी थी मुमानी की!

मैं आगे बोली – मुझे तो अफ़रोज़ और आज़रा पर तरस आता है कि बेचारी इतनी कातिल जवानी लेकर भी प्यासी हैं.

तब भाई ने कहा – क्या किया जा सकता है?

तब मैंने कहा – भाई अगर अफ़रोज़ तुमसे चोदने को कहे, तो क्या तुम चोदोगे उसे?

तब भाई ने कहा – हां क्यूं नहीं, कहीं न कहीं तो वो अपनी चूत की प्यास बुझायेगी ही तब घर में ही क्यूं नहीं. अम्मी का कहना भी यही है कि चुदायी की पहल हमेशा घर से ही करनी चाहिये. तभी तो मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखता हूँ.

तभी मैं भी झड़ने के करीब आ गयी और भाई से कहा – अब बातें बाद में चोदना, मैं झड़ रही हूँ, पहले मुझे सम्भालो!

भाई बातें भूल कर फ़िर से मुझे चोदने लगे और मैं झड़कर एक तरफ़ लेट गयी.

मैंने भाई से कहा – भाई, मैं अफ़रोज़ से बात करुंगी. हो सकता है काम बन जाये, बेचारी को तरसना ना पड़े!

और फ़िर धीरे से दरवाज़े की तरफ़ देखा तो अफ़रोज़ नीचे जा चुकी थी.

तब ही मैंने हंस कर कहा – साले बहुत मज़ेदार नाटकबाज़ हो तुम! खूब जोरदार चुदायी का नाटक करते हो.

तब भाई ने कहा – साली रण्डी, तू भी किसी कुतिया से कम नहीं है. ऐसे चिल्ला रही थी, जैसे पहली बार मरवा रही हो चूत! अच्छा ये बताओ कि अब क्या अफ़रोज़ की चूत में खलबली हुई होगी?

तब मैंने कहा – 100% खलबली हुई होगी. अरे तुम्हारा हलब्बी लंड देखकर अफ़्फ़ो क्या उसकी तो अम्मी भी अपनी चूत पसार देगी तुम्हारे आगे! ये तो अच्छा ही हुआ कि उसने हमारी चुदायी देख ली, अब मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. काम आसान हो गया है साली खुद ही राज़ी हो जायेगी.

तब भाई ने कहा – ये तो अच्छा हुआ कि अफ़रोज़ ही आयी थी. अगर कहीं मामु जान आय होते तो क्या होता?

मैंने कहा – तुम्हारा क्या होता? जो होता मेरा होता वो अपना बम पिलाट लंड लेकर आ जाते और मेरी खुली चूत में डाल देते. हालत मेरी खराब होती!

तब भाई ने कहा – हालत क्यूं खराब होती मेरी जान? तुम्हें तो मैं इतना एक्सपर्ट कर चुका हूँ कि तुम तो चार लंड एक साथ अपनी चूत में ले चुकी हो. फ़िर भला मामू किस खेत की मूली हैं.

मैंने कहा – साले मूली नहीं, पूरा बांस है उनका लंड मैंने देखा है कितना लम्बा है. अगर तेरी गांड में डाल दे तो बरदाश्त नहीं कर पायेगा. बातें चोद रहा है!

तब भाई ने हंसते हुए कहा – अच्छा अच्छा मेरी छिनाल बहन, अब कपड़े पहन लो क्योंकि मामू को तो तुम्हारी चूत झेल लेगी. अगर कहीं अफ़रोज़ अपनी अम्मी और बहन दोनों के साथ आ गयी, तो मेरा लंड अभी इस हालत में नहीं है कि मैं उन तीनों को एक साथ झेल जाऊँ.

बठाये अपने लंड की ताकत! मालिस और शक्ति वर्धक गोलियों करे चुदाई का मज़ा दुगुना!

मैंने कहा – सिर्फ़ तीन क्यों? मुझे नहीं गिन रहे हो? चारों को चोदना पड़ेगा तुम्हें!

और ये कह कर मैं हंसने लगी और भाई भी हंसने लगे.

और वहीं छत पर अफ़रोज़ को भी ऊपरी मजा यानि खाली चूची मसलने का मजा दिया. उसके बाद उसकी चुदाई भी की पर उसके बारे में अगली कहानी में बताऊँगी.

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