रानी मेरे दोस्त की सेक्सी पत्नी – भाग 3

कहानी का पिछला भाग, यहाँ पढ़े  – रानी मेरे दोस्त की सेक्सी पत्नी – भाग 2 (दोस्त की बीवी और मेरा सोफा)

अभी तक आपने पहले दो भागों में पढ़ा कि रानी की मैंने पहली बार कैसे चुदाई की थी। वो पूरी तरह से संतुष्ट होकर मेरे घर से गयी थी। अब आगे की कहानी में और जानें कि आगे की चुदाई कैसे हुई!

शाम को मैं करीब 8:30 पर खाना खा करके फ़्री हुआ और रानी के आने का इंतज़ार करने लगा। करीब 8:45 पर अनिल रानी को लेकर आ गया और उसे छोड़कर चला गया और बोला मैं काम निबटाकर जल्दी से आता हूं। अगर देर हो जाये, तो मेरा इंतज़ार करना घबराना नहीं, राजू शरीफ़ आदमी है।

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रानी ने आज प्रिंटेड बलोउस, लाईट कलर की साड़ी और और अंदर गहरे रंग का ब्लाउज़ पहना था। उससे अंदर के कपड़े का आइडिया मुझे नहीं लग पाया।

रानी और मैं फ़िर पेपर तैयार करने में लग गये, पर आज मैं थोड़ा मस्ती के मूड में था, तब भी हमारा काम एक घंटे में हो गया।

मैं आज बीच में दो तीन बार रानी की कभी जांघ पर तो कभी उसकी कमर पर और कभी उसके ब्लाउज़ के बाहर से उसके बूब्स पर छू रहा था।

रानी मुझे रोक देती और कहती, अरे पहले काम पूरा करने दो। फ़िर अगर मौका मिला तो मैं मना थोड़े ही कर सकती हूं।

जब काम पूरा हो गया। तो मैं अब रानी के साथ मस्ती के मूड में था पर कोई सिग्नल रानी ने नहीं दिया। तो मैं उसे एम्ब्रस नहीं करना चाहता था।

रानी से मैंने पूछा – आज जब अनिल तुमको छोड़ कर गये, तो उसने ये क्यों बोला की राजु शरीफ़ आदमी है।

तब रानी बोली – कल अनिल मुझसे बोल रहे थे कि राजू बहुत ही बेवकूफ़ है। अगर उसे मौका मिलता (किसी की वाइफ़ के साथ अकेले रहने का) तो वह जरूर मौके का फ़ायदा उठाता।

फ़िर रानी बोली – जब मैंने कहा कि अगर औरत ने गड़बड़ कर दी, तो वह बोल रहे थे कि अगर वह किसी औरत को एक्साइट करे, तो वह मना कर ही नहीं सकती है।

रानी फ़िर बोली – इसीलिये मुझे भी उनकी बात सुनकर मरदों की मानसिकता के बारे में पता चल गया और वह कोई गलती नहीं कर रही है और मैं भी ऐसा न करूं।

अब मैंने कहा – ये बात तो ठीक है, पर आपको तो मालूम है न मैं भी बड़ा कमीना हूं और आज तो मैं अब तुमको इस समय नहीं छोड़ सकता हूं, जब दोनों फ़्री हैं।

रानी कुछ ज्यादा नहीं बोली तो मैंने कहा – पर आज मैं तुमको पूरी तरह से प्यार करना चाहता हूं, क्योंकि आज हमारे पास टाइम काफ़ी है।

फ़िर मैं रानी का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर ले आया, और उसे आराम से चूमते हुए उसकी इच्छा जानने की कोशिश करने लगा।

रानी बोली – हाँ राज, आज मैं चाहती हूं कि तुम मुझे ऐसे प्यार करो, जैसे अनिल पहले पहले किया करते थे।

मैं बोला – चलो पहले ऐसा करते हें, एक दूसरे के कपड़े उतारते हैं। मुझे महाभारत की दरौपदी की तरह अपनी पार्टनर के कपड़े उतारने में बड़ा मज़ा आता है और अगर वह विरोध करे तो और मज़ा आता है। क्या मैं स्टार्ट करूं?

रानी बोली – नहीं पहले मैं तुम्हारे कपड़े उतारुंगी। अगर मेरे कपड़े पहले उतर गये, तो तुम मुझे मौका ही कहाँ दोगे! मैं मर्दों की आदत जानती हूँ।

मैंने कुरता पायजामा पहना था और रानी ने एक झटके मेरे कुरता और बनियान खींचकर मेरे पायजामे का नाड़ा खोल दिया और तब तक मैंने भी अपना अंडरवियर नीचे कर दिया।

रानी ने मेरे लंड को देखकर थोड़ा हैरान सी हुई। मैं जानता था कि उसे तो अनिल के लम्बे लंड की आदत थी न और फ़िर मेरा लंड उस समय खड़ा भी नहीं था।

फ़िर मैंने रानी के साड़ी के पल्लू को खींचना शुरु किया और रानी घूम घूम कर अपनी साड़ी उतारने लगी।

जब साड़ी उतर गयी, तो मैंने रानी को पकड़ कर उसके ब्लाउज़ के हुक एक एक करके खोलकर उसका ब्लाउज़ भी उतार दिया।

उसी समय अनिल का फोन आया, तो मैं समझा कि आज तो काम का सत्यानाश हो गया। पर अनिल ने पूछा कितना काम बाकी है, तो मैंने कहा आधे से थोड़ा कम!

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तो अनिल बोला – आराम से काम कर लो, मुझे अभी एक घंटा और लगेगा। मैं 11:00 बजे तक आऊँगा।

रानी ने कहा – ठीक है, पर जल्दी की कोशिश करना, ज्यादा लेट से सभी परेशान होंगे।

अब तो हम और भी रिलेक्स हो गये। रानी ने अंदर सफ़ेद ब्रा पहन रखी थी। उसकी ब्रा एकदम टाइट थी और उसके बूब्स उसके अंदर कैद हो गये थे।

मैंने एकदम से रानी को पकड़ कर उसकी टांगों को पेटीकोट सहित अपनी टांगों के बीच फ़ंसाकर उसे जकड़ लिया और फ़िर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। जैसे ही उसकी ब्रा से उसके बूब्स आज़ाद हुए, ऐसा लगा जैसे कोई धमाका हुआ। उसके बूब उछलकर मेरे सामने आ गये।

क्या टाइट गोल एकदम क्रिकेट बाल की तरह ही लाल, मन तो कर रहा था कि एक झटके में दोनों को मसल दूं। पर मैं उसे पूरा नंगा करना चाहता था।

उसके बाद मैंने रानी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया, पर उसका पेटीकोट नीचे नहीं आया।

उसके पेटीकोट में इलास्टिक लगी हुई थी, इसलिये वो नीचे नहीं गिरा। तो मैंने उसके पेटीकोट को नीचे को जोर से खींचा, तो उसका काले रंग का पेटीकोट एकदम नीचे आ गया।

जैसे ही रानी का पेटीकोट नीचे हुआ, मेरी तो मस्ती का ठिकाना ही नहीं रहा। जब मैंने देखा कि रानी ने तो पैंटी पहनी ही नहीं थी।

अब हम दोनों एकदम नंगे हो गये थे। रानी ने आज शायद अपनी चूत साफ़ की थी, इसीलिये उसके पूरी बोडी पर सर के सिवा कहीं एक बाल भी नज़र नहीं आ रहा था।

जब तक मैं रानी के बदन पर नज़रें फ़ेर पाता, रानी मेरे लंड को देखकर बोली – अरे ये तो बहुत छोटा है। चलो मैं अभी इसे तैयार करती हूं।

और उन्होंने उसको धीरे से पकड़ा और उसके टोपे (टोप) पर अपनी जीभ से लिक करने लगी।

मुझे बड़ी सरसराहट सी होने लगी, रानी बीच में मेरे लंड के टोपे को अपने लिप्स से भी दबा देती। इससे मेरे लंड का साइज़ अब बढ़ने लगा। तो रानी ने भी उसे अपने मुंह के अंदर लेना शुरु कर दिया और मुझे ये बड़ा अजीब लग रहा था।

ऐसा मैंने केवल कुछ ब्लू फिल्म्स में ही देखा था और मैं ये नहीं सोच सकता था कि किसी दिन मेरे साथ भी ऐसा होगा।

मैं ये भी विश्वास नहीं कर पा रहा था कि एक सीधी साधी औरत रानी ऐसा कर सकती है! पर उसका पति अनिल बड़ा स्मार्ट, हैंडसम और हरामी भी है, उसने उसको ट्रैंड कर रखा था।

मैं तो सेक्स का मतलब बस चुदायी तक ही समझता था और जब ऐसा सीन मैंने एक ब्लू फ़िल्म में देखा था तो मुझे उल्टी सी आने लगी थी। पर आज जब मेरे साथ ये हो रहा था, तो बड़ा मज़ा आ रहा था। यहाँ तक कि मुझे इस में अब रानी की चुदायी से ज्यादा आनंद आ रहा था। बसौसे इसमे मुझे कोई ताकत नहीं लगानी पड़ रही थी।

जैसे जैसे मेरे लंड का साइज़ बढ़हा गया, रानी ज्यादा मस्त होने लगी। अब जब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया, तो वह मेरे लंड को लेमन जूस वाली टोफ़ी की तरह से चूसने लगी।

दोस्तों जब वह मेरे लंड को मुंह में लेकर आगे पीछे करती, तो मुझे तो उसमें अब तक की गयी चुदायी से ज्यादा मज़ा आने लगा था। मैं जोश में कभी कभी रानी के मुंह को उसकी चूत समझ कर चुदायी वाले एक्शन में अपना लंड उसके मुंह में डाल देता था।

रानी मेरे लंड को पूरा खाने वाली स्टाइल में मुंह में लिये हुए थी और कभी मुंह से बाहर निकाल देती और फ़िर पूरा मुंह में ले लेती। मस्ती में वह कभी कभी मेरे लंड को दांतों से भी दबता देती, ऐसे में मेरी तो चीख ही निकल गयी, तो घबरा कर रानी थोड़ा ढीली हो गयी।

फ़िर रानी ने मेरे लंड को जड़ से पकड़ कर कभी चाटना और कभी मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरु कर दिया।

थोड़ी देर में रानी ने मेरे लंड को मुंह में लेकर उसको गुब्बारे की तरह से फुलाना शुरु कर दिया और कभी उसे अंदर को चूसने लगी।

कभी वह अपने मुंह से मेरा लंड निकाल कर मेरे लंड के टोपे पर लिप्स रखकर उसे चूसने लगी।

ऐसे में तो मुझे ऐसा लगता जैसे मेरी सांसें ही बंद हो जायेंगी। पर रानी मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगती।

मेरे लिये सेक्स का ये अलग एक्सपेरिएंस था, पर था बड़ा मज़ेदार एक्सपेरिएंस।

रानी की मस्ती बढ़ती ही जा रही थी और वह मेरे लंड को कैंडी आइस क्रीम की तरह उसे कर रही थी। मुझे भी थोड़ा बहुत डर के बावजूद बड़ा मज़ा आ रहा था।

यारों, सेक्स में पता नहीं क्यों दर्द में ही मज़ा आता है! जैसे किसी कड़वी दवा से ही आराम मिलता है।

रानी की मस्ती तो बढ़ रही थी पर अब मेरे लंड के अंदर से फ़्लो बाहर को होने का अहसास सा हुआ, तो मैंने चिल्लाकर कहा – रानी अब नहीं रुका जरा है, रुको।

रानी तो पुरानी खिलाड़ी थी, उसने लंड से मुंह हटा लिया और मेरे लंड के टोपे को हाथ से दबाकर बोली – लल्ला चिंता न करिये, मैं तो तुम्हारा ये आइस क्रीम खाने के लिये पूरी तरह तैयार हूं और इसके बाद उसने मेरे लंड को पूरा मुंह के अंदर ले लिया।

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इसके तुरंत बाद मेरे लंड से हुई सारी बरसात रानी के मुंह के रास्ते उसके पेट में चली गयी।

जब मेरा पूरा क्रीम झड़ गया, तो रानी फ़िर से मेरे लंड को अच्छी तरह से चूसने लगी।

रानी ने मेरे लंड को सावधानी से चाटना शुरु कर दिया और मेरे लंड के माल का एक एक कतरा भी वह चूस लेना चाहती थी।

मेरा लंड दुबारा से सिकुड़ कर छोटा हो गया था, पर उतना नहीं जितना रानी की चुदायी के बाद।

रानी को जब ये लगा कि अब मेरे लंड का सरा माल वो चाट चुकी है, तो उसने अपना मुंह मेरे लंड से हटा लिया।

रानी को शायद बड़ा मज़ा आया था, मेरी तरह से ही वह बड़ी खुश थी। जैसे कोई अच्छी चीज़ बहुत दिनो के बाद मिली हो।

रानी बोली – लल्ला ये मेरा भी पहला तज़ुर्बा है। ऐसे केरने पर बड़ा मज़ा दिया राजु तूने। मैंने तो एक बार टीवी में तेरे भैया के साथ देखी थी, तो तेरे भैया मुझे छेड़ते हुए बोले थे कि उनका चूसेगी तो मैंने मना कर दिया था। पर आज तेरा लंड देखते ही, मैं मचल रही थी। एक बार ऐसा करके देखूं, आज़ राजु बड़ा मज़ा आया।

मैं बोला – हाँ रानी मुझे बड़ा अच्छा लगा पर अब बहुत देर हो गयी है, अब हमें चलना चाहिये।

फ़िर रानी ने मेरे लंड को कभी चाटना और कभी मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरु कर दिया और कभी रानी मेरे लंड को मुंह में लेकर उसको गुब्बारे की तरह से फुलाना शुरु कर दिया और कभी उसे अंदर को चूसने लगी।

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फ़िर वह अपने मुंह से मेरा लंड निकाल कर, मेरे लंड के ऊपर लिप्स रखकर उसे चाटने लगी।

ऐसे में तो मुझे ऐसा लगता, जैसे कोई मेरे लंड को सहला रहा हो और उसका साइज़ बढ़ने लगा। पर अगले पल रानी मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगती और मेरा लंड एकदम लोहे की तरह कड़ा और चुदायी के लिये तैयार होता चला गया।

शेष अगले भाग में और यह भी जानें कि अगली बार कैसे चुदाई और ट्रीट कैसे मिली। जानने के लिये अगला भाग अवश्य पढ़ें…

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