रिक्षवाला और मम्मी की चुदाई देखी

सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार।

इंडियन एडल्ट स्टोरी के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

हेलो दोस्तो.. मेरा नाम नीलेश है. मेरी मा का नाम गीता है. मेरे पापा दुबई मे काम करते है. साल मे सिर्फ़ एक बार एक महीने के लिए आते है. जब पापा आते है तब ही मम्मी की चुदाई होती है. बाकी साल के ग्यारह महीने मम्मी प्यासी रह जाती है.

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वैसे मैं मम्मी के बारे में बता दूं मम्मी का रंग गोरा फिगर भरावदार मतलब 40 34 40 है. मम्मी के बूब्स गोल गोल घुमावदार है. जब कभी मम्मी को सेक्स चढ़ता है तो चुपके चुपके एक छोटी लौकी से अपनी चुत की जलन शांत करती है.

ये बात तबकि है जब मैं दसवी मे पढ़ता था. मैं और मम्मी शॉपिंग करने निकले थे. अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गयी. मैं और मम्मी लगभग पूरे भीग चुके थे.

मम्मी की सारी तो पूरी बदन से चिपक गयी थी. मम्मी का कामुक बदन नुमाया हो रहा था. मम्मी ने कहा बेटा कोई रिक्शा मिल जाए तो हमे निकलना चाहिए.

फिर मैं रिक्शा ढूँढ ने लगा तो बड़ी मुश्किल से एक रिक्षावाला मिला. पहले तो वो जाने के लिए मना कर रहा था. पर जब मम्मी को देखा तो फट से मान गया. हम रिक्शा मे बैठ गये. वो रिक्षावाला चलने लगा. बारिश तेज़ थी और जगह जगह पानी भरा हुआ था.

रिक्षावाला थोड़ा बातुनी था. 35 के आसपास की उमर का लगता था और मुछे थी. साइड मिरर से मम्मी को घूर घूर के देख रहा था. फिर उसने हमसे इधर उधर की बाते करनी शुरू कर दी.

हालाकी वो मम्मी से ज़्यादा बातें कर रहा था. मम्मी भी उसके साथ नॉर्मली बातें करने लगी. बादमे उसने मूज़े मेरी पढ़ाई के बारे मे पूछा. फिर पापा के बारे मे पूछा क्या करते है. वगेरा वगेरा..

वो तकरीबन मम्मी के साथ बातें किए जा रहा था. उस टाइम मैने उसे ग़लत इंटेंशन से नही देखा. मूज़े लगा होते है कई लोग जो सबके साथ बोहोत जल्दी घुल मिल जाते है.

वो मम्मी को अपने बारे मे बता रहा था. अपनी ज़िंदगी की किस्से कहानियाँ सुना रहा था. मम्मी भी बड़े गौर से उसे सुनती. बात करती. इसी तरह हम घर पहुँचे. पूरे रास्ते मैं तकरीबन वो हमे अपने बारे मे बता चुका था और मम्मी ने भी हमारे बारे मे इंट्रोडक्षन दे दिया था.

घर पे आते आते रिक्शा मे पानी जाने की वजह से उसकी रिक्शा भी बंद पड़ गयी थी. पास मे कोई मिकॅनिक भी नही था. जो भी होता सवेरे ही काम होता. तो वो हमारे घर के पास रिक्शा छोड़ के जाने लगा. तो मम्मी ने उसे घर पे चाय के लिए बुला लिया. पहले उसने आनाकानी की फिर मान गया. हम घर मे आ गये.

मैने फ़ौरन अपने गीले कपड़े चेंज किए. मम्मी ने भी सारी उतार के नाइटी पहन ली. राजू [उस रिक्षवाले का नाम] के कपड़े भी पूरे भीग चुके थे और ठंड से काँप रहा था. ये कहानी आप इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

तो मम्मी ने उसे कहा वो अपने शर्ट पेंट उतार के दे वो जल्दी से वॉशिंग मशीन मे डाल के सूखा देगी. तब तक वो मेरे पापा की पुरानी लूँगी है वो पहन ले. तो उसने बाथरूम मे जाके अपने कपड़े चेंज किए. मम्मी ने उसे पापा की पुरानी लूँगी दी तो वो सिर्फ़ लूँगी मे बाहर निकला. उसके मर्दाना शरीर पे थोड़े थोड़े बाल थे. अछा हॅशट्पूश शरीर था उसका. अब मम्मी चाय बनाने किचन मे गयी तो वो मम्मी से ही बाते कर रहा था.

मम्मी भी उससे हस हस के बाते कर रही थी. नाइटी मे मम्मी ने ब्रा पैंटी नही पहनी थी जिस से मम्मी के मोटे मोटे वक्ष और नुकीली चूंचियाँ का शेप सॉफ पता चल रहा था. बार बार राजू की निगाह उस पे ही गिर रही थी. मम्मी भी उस के गटिले बदन को देख के आँखे सेक रही थी.

कुछ देर बाद राजू चला गया. फिर हम सो गये. आधी रात को मेरी आँख खुली कुछ आवाज़ो से. उठ के देखा तो मम्मी किचन मे थी और अपनी नंगी टॅंग फैलाए चुत चौड़ी कर के लंबा बैगन चुत से रगड़ रही थी और आअह्ह्ह.. उऊई.. जैसी आवाज़े कर रही थी.

ये तो नॉर्मल था मेरे लिए पर मैं तब चौक गया जब मम्मी ने ये कहा. हाई.. राजू.. मेरी प्यासी चुत को चोद दो.. मेरी रस भारी चुत को मसल दो.. आअह्ह्ह… इसका मतलब मम्मी राजू को इमॅजिन कर के मास्टरबेट कर रही थी. फिर मैं अपने बेड पे आ गया और मम्मी के बदले बिहेवियर के बारे मे सोचते सोचते सो गया.

सुबह मम्मी ने मूज़े उठाया. मैं फ्रेश हो के नाश्ता किया और स्कूल के लिए निकल गया. मम्मी सुबह ए रोज़मर्रा के मुताबिक काम कर रही थी. फिर मूज़े रास्ते मे राजू मिला वो अपनी रिक्शा लेने आया था. मैने उससे ओपचारिक बात कर के निकल गया. स्कूल से घर आया तो मम्मी घर पे नही थी. फिर मैं फ्रेश हो के टीवी देखने लगा.

थोड़ी देर बाद मूज़े रिक्शा के रुकने की आवाज़ आई तो मैने बाहर निकल के देखा तो राजू की रिक्शा से मम्मी उतर रही थी और दोनो घर की तरफ आ रहे थे हस्ते हस्ते बाते करते हुए. दोनो घर मे आए मम्मी ने मुझसे कहा. आ गया बेटा.

मैने कहा हा. राजू की और इशारा कर के मम्मी से पूछा तो मम्मी ने कहा. वो बेटा सुबह मैं रिक्शा लेने आया था ना तो. रिक्शा बन गयी तो मैं मार्केट जा रही थी तो मूज़े राजू ले गया. बहोत हेल्प की इसने मेरी. फिर राजू और मम्मी दोनो बातें करने लगे और चाय पी के चला गया. मैने मम्मी से पूछा.

मम्मी आपको नही लगता राजू अंकल कुछ ज़्यादा फ्री हो रहा है हमारे साथ? तो मम्मी ने कहा बेटा ऐसी कोई बात नही है. वो बेचारा इस शहर मे अकेला है. बीवी बच्चे गाँव मे है और भोला भला है. उसे हमारे साथ टाइम स्पेंट करना अछा लगता है.

तो इसमे कोई बुराई नही है. हम भी तो अकेले है. थोड़ी कंपोनी मिल गयी हमे भी. फिर मैने मम्मी से ज़्यादा बहस नही की अपने काम मे लग गया. वक़्त ऐसे ही गुज़रता रहा. राजू किसी ना किसी बहाने हमारे घर आता मम्मी की कोई हेल्प करता. मुझसे कम मम्मी से ज़्यादा बाते करता.

एक दिन में ट्यूशन बंक कर के मूवी देखने गया. पूरी मूवी देखी पर अभी घर जाने के लिए बोहोत टाइम था तो मैं पास वाले गार्डेन मे टहलने के लिए गया. वहाँ पर सब बूढ़े बच्चे खेल रहे थे. झाड़ियों मे कपल्स रोमॅन्स कर रहे थे. मैं ऐसे ही घूम रहा था तब मेरी नज़र एक झाड़ी के कोने मे पड़ी पहले तो मैने इग्नोर किया फिर चुपके से गौर से देखा तो मुझे विश्वास नही हुआ.

मम्मी झाड़ी के नीचे टाँगे फैलाक़े बैठी थी और राजू मम्मी की टांगो पे सिर रख के लेटा था. मम्मी राजू के सिर पे हाथ फेर रही थी और राजू मम्मी के बूब्स मसल रहा था.

मम्मी राजू को कभी गाल पे किस करती कभी नाक पे और कभी होंटो पे दोनो ऐसे खुले मस्ती कर रहे थे. मूज़े अपनी आँखो पे विश्वास नही हो रहा था. मम्मी गैर मर्द के साथ रोमॅन्स कर रही थी. पर ये सब देख के मूज़े पता नही क्यूँ दिल मे अलग सा महसूस हो रहा था.

मैं देखना चाहता था आगे दोनो क्या करते है.

फिर कुछ देर बाद दोनो उठ गये और बाहर की और चलने लगे. राजू मम्मी की कमर मे हाथ डाल के चल रहा था. जेसे दोनो लवर्स हो. फिर वो दोनो रिक्शा मे बैठ गये और वहाँ से निकल पड़े.

मैं भी अपनी साइकल पे उनके पीछे निकल पड़ा. वो सीधे मेरे घर के पास रुके. मैं दूर ही खड़ा रहके उनको देखता रहा. दोनो घर मे गये तो राजू ने घर का डोर बंद कर दिया. मैं देखना चाहता था दोनो अकेले घर मे क्या करते है. मैं अपने घर के पास लगी विंडो से अंदर झाँका.

राजू ने मम्मी को बाहों मे जकड रखा था और दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे. राजू ने मम्मी की सारी का पल्लू हटा दिया तो मम्मी के मोटे बूब्स को ब्लाउस मे से ही मसलने लगा. मम्मी ने भी राजू को बाहों से कस के पकड़ रखा था. दोनों के एक एक कर के कपड़े उतरते गये. मम्मी को तो वैसे मैने कई बार नंगी देखा था.

पर वो आज एक गैर मर्द के सामने नंगी थी.

राजू मम्मी के कामुक बदन को अपने कठोर हाथो से मसल रहा था. राजू ने जब अपना कच्छा उतारा तो मैं दंग रह गया राजू का लंड देख के उसका ९ इंच का काला लंड किसी बंबू की तरह बड़ा था. उसका सुपाड़ा फूला हुआ. मम्मी ने उसके लंड को चूसा और ड्रॉयर से कॉंडम निकाल के उसके लंड पे चढ़ाया.

फिर दोनो की घमासान चुदाई शुरू हो गयी. पहेल तो उसका बड़ा लंड मम्मी की चुत मे गया तो मम्मी को थोड़ा दर्द हुआ फिर एंड मे आअहह… उउउइ…मा.. चोदो.. राजू.. मेरी प्यास बुझाऊ.. करने लगी. राजू भी घाप घाप चोद रहा था.

उन दोनो की चुदाई देख के मेरा लंड पथ्थर की तरह अकड़ गया था. मैं पैंट के उपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा. करीब आधे घंटे तक राजू मम्मी को दो अलग पोज़िशन मे चोद रहा था. फिर दोनो साथ मे झड़ गये और वही फर्श पे लेट गये. मम्मी ने उसे याद दिलाया की मैं कभी भी आता ही हुंगा इसलिए वो जल्दी कपड़े पहन के निकल जाए.

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मैं फिर वहाँ से निकल के दूर खड़ा रहा और देखा राजू घर से चला गया फिर मैं घर गया. बाथरूम मे जाके मॅस्टयर्बिट कर के हल्का हुआ.

बाद मे कई बार मैने राजू और मम्मी का सेक्स देखा. मम्मी की पर्सनल लाइफ थी मूज़े कोई प्राब्लम नही थी. पापा साल मे जब घर आए तब ही मम्मी चुदेगी तो मम्मी बाकी के दिनों मे अपनी प्यास राजू से बुझाने लगी.

कैसी लगी आपको मेरी इंडियन एडल्ट स्टोरी. कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कॉमेंट सेक्षन मे ज़रूर लिखे. ताकि इंडियन सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर कहानियों का ये दौर आपके लिए यूँ ही चलता रहे. (sunny@indianadultstory.com)

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