छोटे भाई को तडपाके मज़े लिये – भाग २

कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कैसे मेने अपने छोटे भाई की मुठ मारने में सहायता की और उसको लड़की पटाने की आइडियाज देने लगी. यह कहानी पढ़ने से पहले कहानी का पिछला भाग जरूर पढ़ना – लड़की पटाने की कला

पर आप सब को मेरी चुत की प्यास तो मालूम ही हे, ना जाने कब से भाई के लंड को लेने के लिए तड़प रही हे. इसी कहनी में आगे पढ़िए, कैसे मेने अपने भाई के लंड को मेरी प्यासी चुत में लिया!

अब आगे…

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“पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे संतरे हैं, तारीफ़ के काबिल तो आपके है.” वह बोला और शरमकार मुँह छुपा लिया. मुझे तो इसी घड़ी का इंतेज़र था. मैने उसका चेहरा पकड़कर अपनी ऊर घूमते हुवे कहा, “मैं तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तू  मुझी पर नज़रे जमाए है”

“नही दीदी सच मैं आपकी चूचियाँ बहुत प्यारी है, बहुत दिल करता है” और उसने मेरी कमर मैं एक हाथ डाल दिया. “अरे क्या करने को दिल करता है ये तो बता!” मैने इतलकर पूच्हा.

“इनको सहलने का और इनका रस पीने का.” अब उसके हौसले बुलंद हो चुके थे और उसे यक़ीन था की अब मैं उसकी बात का बुरा नही मनूंगी. “तू कल रात बोलता. तेरी मुठ मरते हुवे इनको तेरे मुँह मैं लगा देती. मेरा कुछ  घिस तो नही जाता. चल आज जब तेरी मुठ मरूंगी, तो उस वक़्त अपनी मुराद पूरी कर लेना.” इतना कह उसके प्यजमा मैं हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया जो पूरी तरह से टन गया था. “अरे ये तो अभी से तय्यार है!”

तभी वह आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छूपा लिया. मैने उसको बानहो मैं भरकर अपने क़रीब लिटा लिया और कस के दबा लिया. ऐसा करने से मेरी चुत उसके लंड पर दबने लगी. उसने भी मेरी गर्दन मैं हाथ डाल मुझे दबा लिया. तभी मुझे लगा की वो ब्लौस के ऊपर से ही मेरी लेफ्ट चूचि को चूस रहा है. मैने उससे कहा “अरे ये क्या कर रहा है! मेरा ब्लौस ख़राब हो जाएगा.”

उसने झट से मेरा ब्लौस ऊपर किया और निपपले मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं उसकी हिम्मत की दाद दिए बग़ैर नही रह सकी. वह मेरे साथ पूरी तरह से आज़ाद हो गया था. अब यह मेरे ऊपर था की मैं उसको कितनी आज़ादी देती हूँ. अगर मैं उसे आगे कुच्छ करने देती तो इसका मतलब था की मैं ज़्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिए और अगर उसे माना करती तो उसका मूड ख़राब हो जाता और शायद फिर वह मुझसे बात भी ना करे. इसलिए मैने बीच का रास्ता लिया और बनावती ग़ुस्से से बोली, “अरे ये क्या तो ज़बरदस्ती करने लगा. तुझे शरम नही आती.”

“ओह् दीदी आपने तो कहा था की मेरा ब्लौस मत ख़राब कर. रस पीने को तो मना नही किया था. इसलिए मैने ब्लौस को ऊपर उठा दिया.” उसकी नज़र मेरी लेफ्ट चूचि पर ही थी जो की ब्लौसे से बाहर थी. वह अपने को और नही रोक सका और फिर से मेरी चूचि को मुँह मैं ले ली और चूसने लगा. मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास इकरार  कर रहि थी. कुच्छ देर बाद मैने ज़बरदस्ती उसका मुँह लेफ्ट चूचि से हटाया और राइट चूचि की तरफ़ लाते हुवे बोली, “अरे साले ये दो होती हैं और दोइनो मैं बराबर का मज़ा होता है”

उसने राइट मम्मे को भी ब्लौस से बाहर किया और उसका निपपले मुँह मैं लेकर चुभलने लगा और साथ ही एक हाथ से वह मेरी लेफ्ट चूचि को सहलने लगा. कुच्छ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होठो को चूमने को करने लगा तो मैने उससे कहा, “कभी किसी को क़िस किया है?” “नही दीदी पर सुना है की इसमे बहुत मज़ा आता है”

“बिल्कुल ठीक सुना है पर क़िस ठीक से करना आना चाहिए.”

“कैसे?”

उसने पूछा और मेरी चूचि से मुँह हटा लिया. अब मेरी दोनो चूचियाँ ब्लौस से आज़ाद खुली हवा मैं तनी थी. लेकिन मैने उन्हे छूपाया नही, बल्कि अपना मुँह उसके मुँह के पास लेजाकर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए. फिर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी. क़रीब दो मिनुटे तक उसके होंठ चूस्ती रही फिर बोली.

“ऐसे.”

वह बहुत एक्ससाटेड हो गया था. इससे पहले की मैं उसे बोलूं की वह भी एक बार कोशिश करने की प्रकटिसे कर ले, वह ख़ुद ही बोला, “दीदी मैं भी करूँ आपको एक बार?” “कर ले.” मैने मुस्कराते हुवे कहा.

अमित ने मेरी ही स्टयले मैं मुझे क़िस किया. मेरे होठो को चूस्ते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था. जिससे मेरी मस्ती दोगुनी हो गयी थी. उसका क़िस ख़तम करने के बाद, मैने उसे अपने ऊपर से हटाया और बानहो मैं लेकर फिर से उसके होठ  चूसने लगी. इस बार मैं थोड़ा ज़्यादा जोश से उसे चूस रही थी.

उसने मेरी एक चूचि पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था. मैने अपनी कमर आगे करके चुत उसके लंड पर दबाई. लंड तो एकदम तनकर गर्म रोड हो गया था. चुदवाने का एकदम सही मौक़ा था पर मैं चाहती थी की वह मुझसे चोदने के लिए भीख मांगे और मैं उसपर एहसान करके उसे चोदने की इज़ाज़त दूं.

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मैं बोली, “चल अब बहुत हो गया, ला अब तेरी मुठ मार दूं.” “दीदी एक रेक़ुएस्ट करूँ?” “क्या?” मैने पूच्हा. “लेकिन रेक़ुएस्ट ऐसी होनी चाहिए की मुझे बुरा ना लगे.”

ऐसा लग रहा था की वह मेरी बात ही नही सुन रहा है. बस अपनी कहे जा रहा है. वह बोला, “दीदी मैने सुना है की अंदर डालने मैं बहुत मज़ा आता है! डालने वाले को भी और डलवाने वाले को भी. मैं भी एक बार अंदर डालना चाहता हूँ.”

“नहीं अमित तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं तुम्हारी बड़ी बहन.” “दीदी मैं आपकी लूंगा नही बस अंदर डालने दीजिए.” “अरे यार तो फिर लेने मैं क्या बचा!” “दीदी बस अंदर डालकर देखूँगा की कैसा लगता है चोदुँगा नही प्लीज दीदी.”

मैने उसपर एहसान करते हुवे कहा, “तुम मेरे भाई हो इसलिए मैं तुम्हारी बात को मना नही कर सकती, पर मेरी एक शर्त है तुमको बताना होगा की अक्सर ख़्यालो मैं किसको चोदते हो?” और मैं बेद पर पैर फैलाकर चित्त लेट गयी और उसे घुटने के बल अपने ऊपर बैठने को कहा.

वह बैठा तो उसके प्यजमा के ज़रबंद को खोलकर प्यजमा नीचे कर दिया. उसका लंड तनकर खड़ा था. मैने उसकी बाँह पकड़ कर, उसे अपने ऊपर कोहनी के बल लिटा लिया, जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटनो और कोहनी पर आ गया.

वह अब और नही रुक सकता था. उसने मेरी एक चूचि को मुँह मैं भर लिया, जो की ब्लौस से बाहर थी. मैं उसे अभी और छेड़ना चाहती थी. “सुन अमित ब्लौस ऊपर होने से चुभ रहा है, ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे संतरे ढांप दे.”

“नही दीदी मैं इसे खोल देता हूँ.” और उसने ब्लौस के बुट्तों खोल दिया. अब मेरी दोनो चूचिया पूरी नंगी थी. उसने लपककर दोनो को क़ब्ज़े मैं कर लिया.

अब एक चूचि उसके मुँह मैं थी और दूसरी को वह मसल रहा था. वह मेरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैने अपना पेट्टीकोत ऊपर करके, उसके लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया.

कुच्छ देर बाद लंड को चुत के मुँह पैर रखकर बोली, “ले अब तेरे चाकू को अपने खर्बूजे पर रख दिया है पर अंदर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तू बहुत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है”

वह मेरी चूचियों को पकड़कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होठ  मेरे होठ पर रख दिए. मैं भी अपना मुँह खोलकर उसके होठ  चूसने लगी कुच्छ देर बाद मैने कहा, “हाँ तो मेरे प्यारे भाई, अब बता तेरे सपनो की रानी कौन है?”

“दीदी आप बुरा मत मानिएगा पर मैने आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख़्यालो मैं रखकर मारी है.”

“हाय भय्या तो कितना बेसरम है अपनी बड़ी बहन के बारे मैं ऐसा सोचता था.” “ओह् दीदी! मैं क्या करूँ! आप बहुत ख़ूबसूरत और सेक्सी है. मैं तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चुत मैं लंड डालना चाहता था. आज दिल की आरज़ू पूरी हुई.” और फिर उसने शरमकार आँखे बंद करके धीरे से अपना लंड मेरी चुत मैं डाला और वादे के मुताबिक़ चुपचाप लेट गया.

“अरे तो मुझे इतना चाहता है, मैने तो कभी सोचा भी नही था की घर मैं ही एक लंड मेरे लिए तड़प रहा है. पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मैका दे देती.” और मैने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलनी शुरू कर दी. बीच-बीच मैं उसकी गांड भी दबा देती.

“दीदी मेरी किस्मत देखिए कितनी झांतु है, जिस चुत के लिए तड़प रहा था, उसी चुत मैं लंड पड़ा है, पर चोद नही सकता. पर फिर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ.” वह खुल कर लंड चुत  में दाल  बोल रहा था पर मैने बुरा नही माना. “अच्छा दीदी अब वायदे के मुताबिक़ बाहर निकलता हूँ.” और वह लंड बाहर निकालने को तय्यार हूवा.

मैं तो सोच रही थी की वह अब चुत मैं लंड का धक्का लगाना शुरू करेगा, लेकिन यह तो ठीक उल्टा कर रहा था. मुझे उसपर बड़ी दया आई. साथ ही अच्छा भी लगा की वायदे का पक्का है. अब मेरा फ़र्ज़ बनता था की मैं उसकी वफ़ादारी का इनाम अपनी चुत चुदवाकर दूं. इसलिए उससे बोली, “अरे यार तूने मेरी चुत की अपने ख़्यालो मैं इतनी पूजा की है और तुमने अपना वादा भी निभाया, इसलिए मैं अपने प्यारे भाई का दिल नही तूडूंगी. चल अगर तू अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चुत.”

मैने जानकर इतने गंदे वर्ड्स यूज़ किए थे पर वह बुरा ना मानकर ख़ुश होता हूवा बोला, “सच दीदी.” और फ़ौरन मेरी चुत मैं अपना लंड ढकाधक पैलने लगा की कहीं मैं अपना इरादा ना बदल दूं.

“तू बहुत किस्मत वाला है अमित.” मैं उसके कुंवारे लंड की चुदाई का मज़ा लेते हुवे बोली. ”क्यों दीदी?” “अरे यार तू अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई, अपनी ही बहन की कर रहा है और उसी बहन की जिसकी तू जाने क़ब्से चोदना चाहता था.”

“हाँ दीदी मुझे तो अब भी यक़ीन नही आ रहा है, लगता है सपने मैं चोद रहा हूँ. जैसे रोज़ आपको चोदता था.” फिर वह मेरी एक चूचि को मुँह मैं दबा कर चूसने लगा. उसके धक्को की रफ़्तार अभी भी काम नही हुई थी. मैं भी काफ़ी दीनो के बाद चुद रही थी, इसलिए मैं भी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी.

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वह एक पल रुका फिर लंड को गहराई तक ठीक से पैल्कर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. वह अब झड़ने वाला था. मैं भी सातवे आसमान पर पहुँच गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्को का जवाब दे रही थी. उसने मेरी चूचि छोड़कर मेरे हूँतो की मुँह मैं ले लिया, जो की मुझे हमेशा अच्छा लगता था. मुझे चूमटे हुए कसकस्कर दो चार धक्के दिए और “हाए आशा मेरी जान” कहते हुवे झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया. मैने भी नीचे से दो चार धक्के दिए और “हाए मेरे राजा” कहते हुवे झड़ गयी.

चुदाई के जोश ने हम दोनों को निढाल कर दिया था. हम दोनों कुच्छ देर तक यूँ ही एक दूसरे से चिपके रहे. कुच्छ देर बाद मैने उससे पूच्ह, “क्यों मज़ा आया मेरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चुत चोदने मैं! उसका लंड अभी भी मेरी चुत मैं था. उसने मुझे कसकर अपनी बानहो मैं जकदकर अपने लंड को मेरी चुत पर कसकर दबाया और बोला, “बहुत मज़ा आया दीदी. यक़ीन नही होता की मैने अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ.” “तू क्या मैने तेरी मुठ मारी है“ नही दीदी यह बात नही है “तू क्या तुझे अब अफ़सोस लग रहा है अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनने का.”

“नही दीदी ये बात भी नही है मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बनने मैं! मन तो कर रह की बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रस ही पीता रहु . हाय दीदी बल्कि मैं तो सोच रहा हूँ की भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी. अगर एक दो और होती तो सबको चोदता. दीदी मैं तो एह सोच रहा हूँ की, यह कैसे चुदाई हुई की पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चुत देखी भी नही.”

“कोई बात नही, मज़ा तो पूरा लिया ना?” “हाँ दीदी मज़ा तो ख़ूब आया.” “तू घबराता क्यों है? अब तो तूने अपनी बहन चोद ही ली है. अब सब कुच्छ तुझे दिखाओँगी. जब तक माँ नही आती, मैं घर पर नंगी ही रहूंगी और तुझे अपनी चुत भी चटवाउंगी और तेरा लंड भी चूसूंगी. बहुत मज़ा आता है” “सच दीदी?” “हाँ. अच्छा एक बात है तो इस बात का अफ़सोस ना कर की तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है, मैं तेरे लिए और चुत का जुगाड़ कर दूँगी..”

“नही दीदी अपनी बहन को चोदने मैं मज़ा ही अनोखा है बाहर क्या मज़ा आएगा?”

“अच्छा चल एक काम कर तो, माँ को चोद ले और माधरचोद भी बन जा.” “ओह दीदी ये कैसे होगा?”

“घबरा मत पूरा इंतेज़ाम मैं कर दूंगी. माँ अभी 38 साल की है तुझे माधरचोद बनने मैं भी बड़ा मज़ा आएगा.”

“हाय दीदी आप कितनी अच्छी हैं, दीदी एक बार अभी और चोदने दो. इस बार पूरी नंगी करके चोदुँगा.” “जी नही आप मुझे अब माफ़ करिय.” “दीदी प्लीज सिर्फ़ एक बार.” और लंड को चुत पर दबा दिया.

“सिर्फ़ एक बार.” मैने ज़ोर देकर पूच्हा. “सिर्फ़ एक बार दीदी पक्का वादा.”

“सिर्फ़ एक बार करना है तो बिल्कुल नही.” “क्यों दीदी?” अब तक उसका लंड मेरी चुत मैं अपना पूरा रस नीचोड़कर बाहर आ गया था. मैने उसे झटके देते हुवे कहा,

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“अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे?” “हाँ दीदी.”

“ठीक है बाक़ी दिन क्या होगा? बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या? और मैं क्या बाहर से कोई लूंगी? अपने लिए अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिल्कुल नही.”

उसे कुच्छ देर बाद जब मेरी बात समझ मैं आई तो उसके लंड  मैं थोड़ी जान आए और उसे मेरी चुत परा रग़दते हुवे बोला, “ओह दीदी उ र ग्रेट!”

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