गाओं की सर्दी में जवानी की गर्मी – भाग १

कहानी होती ही अतीत की है। समय का अनुमान पाठक स्वयं लगा सकते हैं।

मैंने अपने बचपन का अधिकतर समय अपनी बुआ के गाँव में बिताया, लेकिन पिछले तीन वर्श से नहीं गया।

उनका गाँव बहुत छोटा सा है, लेकिन हमारे फूफाजी वहाँ के सम्मानीय व्यक्ति हैं। हमारी बुआ के यहां ससुर के समय की बनाई गई लखौरी ईटों की पुरानी दो मंजिल की बड़ी सी हवेली है। गाँव के आधे से अधिक खेत और बाग उन्हीं के हैं। लेकिन अब सन्नाटा रहता है।

अपनी सेक्स लाइफ को बनाये सुरक्षित, रखे अपने लंड और चुत की सफाई इनसे!

बुआ के तीन बेटे और चार बेटियाँ हैं, अब वहाँ कोई भी नहीं रहता है। बेटे सभी कबके जाकर शहरों में बस गये। तीनों लड़किया का भी विवाह के बाद यही हाल हुआ।

सब अपने-अपने कार व्यापार में इतने में इतने व्यस्त हो गये कि दबंग व्यक्तित्व की मालकिन हमारी बुआ अकेले घुल-घुल कर समय से पहले ही बूढ़ी हो गयीं।

फूफा का तो खैर इधर-उधर में समय कट जाता, लेकिन हमारे चाचाओं और ताउओं में जो भी जाता अपनी बहन के अकेलेपन से घबरा जाता।

लोग समझाते भी कि जीजी बेटों के पास चली जाओ, लेकिन वह भला कहाँ जाने वाली थीं! बड़ी मुष्किलों से मझिले भय्या के यहाँ जाकर मोतियाबिन्द का आपरेशन करवाया और चली आयीं।

मेरी सरदियों की छुट्टियाँ हुई तो अम्मा ने जबरस्ती भेज दिया। जाकर एक महीने बुआ की सेवा कर आ।

हालाकि मन तो नहीं हो रहा था लेकिन इस वादे पर कि अगर मन लगा तो रुकूँगा नही तो दो-चार दिन में आ जाऊँगा। पहुचाँ तो पता चला कि कल ही बुआ के नन्द की बेटी अमिता दीदी आयी हैं।

उन्हें मैंने बहुत पहले देखा था। जव वह किशोर थीं, लेकिन वह पूरी तरह बदली गंभीर स्वभाव की एक समझदार लड़की थीं। आँखों पर चश्मा लग गया था। रंग गोरा था। लम्बाई दरम्यानी थी। शरीर भरा-भरा था।

संभवताः मुझे देखकर प्रसन्न हुईं। थोड़ा चुप-चुप रहने वाली लगीं। काम के लिए सोलह सत्तरह साल की लड़की कमली थी। वह फिरिंगी की तरह दौड़ती भागती मुझे देखकर बेमतलब ही मुस्कुराती रहती।

बुआ ने कहा कि यह पुराने आदमी राम लखन की बेटी है। शादी तो हो गयी है, लेकिन अभी गौना नहीं हुआ है। दिन पाँच साल का बना है नहीं तो लखना इसे बिदा कर देता, यह कहते हुए उन्होंने ऊपर वाले को धन्यवाद भी किया कि है तो मुँहजोर लेकिन कोई बेटी क्या सेवा करेगी!

मैंने यह भी ध्यान दिया कि वह जितना मुस्कुरा रही थी उतना बोल भी रही थी। मैं कुछ संकोच भी कर रहा था, वह थी कि शाम तक लल्लू भैय्या की ऐसी रट लगाने लगी कि जैसे मुझे कितने दिनों से जानती हो।

कमली का रंग तो साँवला था, लेकिन लम्बाई निकलती हुई थी। उसका अंग-अंग मानों बोलता हो। साधरण से सवाल समीच पर उसकी चुन्नी रुकती ही नहीं थी।

अधिक कहानियाँ : नेपाल में भाभी की चुदाई

मैंने महसूस किया कि उसे घर में मर्द के न रहने से ओढ़ने के आदत थी नहीं, इसलिए चुन्नी संभल नहीं रही थी।

अपनी चुन्नी में उलझते हुए एक बार मेरा मन हुआ कि लाओ उतार कर फेंक दुँ! जैसे यह बात ध्यान में आयी तो एकाएक मेरा ध्यान उसके सीने पर चला गया। हे राम! मैंने गौर किया तो शरीर में सनसनाहट सी हो गयी।

सीने की जगह लग रहा था जैसे दो कटोरे उलट कर रख दिये गये हों! उसकी छातियों के दाने तो इतने खड़े थे, कि कपड़े के ऊपर साफ दिख रहे थे। ऐसे मैं क्या कोई भी उसे देखकर बेकाबू हो जाय! यद्यपि मैं सीधा और ठीक-ठाक चरित्र का लड़का था, तबभी मेरा मन अजीब सा हो गया। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

मैं पिछले तीन साल से हास्टल में रह रहा था। वहाँ मैंने दो-तीन बार नंगी पिक्चरें भी देखी थीं और कुछ दिनों सें अधनंगी पिक्चरों की शहर के सिनेमा हालों में तो बाढ़ सी आ गयी थी।

मैं जिन बातों से गाँव में अनभिज्ञ था वह सब मुझे पता चल गयी थीं। जब भी मैं छुट्टियों के बाद गाँव से लौटता तो सहपाठी खुले शब्दों में अपनी चुदाई की कहानियां बताते और मेरी भी पूछते, चूँकि मेरी कोई कहानी होती नहीं, फिर मुझे अपने आप पर क्रोध आता हर बार कुछ करने का इरादा लेकर जाता, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगती।

हस्त मैथुन जैसी स्वाभाविक गतिविधि ही मेरी काम भावना को शांत करने का एकमात्र साधन थी. लेकिन कमली को देखते ही मैंने मन बना लिया कि चाहे मुझे यहाँ पूरी छुट्टियाँ ही यहाँ क्यों न बितानी पड़ जाये, इसे लिए बिना नहीं जाऊँगा। मैंने इसी भावना से संचालित आते-जाते दो-तीन बार उसके शरीर से अपने शरीर को स्पर्श किया तो उसने बजाय बचने के अपनी तरफ से एक धक्का देकर जवाब दिया।

शाम में चूँकि सर्दी थी इस लिए दिल ढलते बुआ ने आँगन से लगे बरामदे में अलाव की सिगड़ी जलवा दी तो मुहल्ले-पड़ोस की दो तीन औरतें आकर बैठ गयीं।

कमली भी थी। अमिता दीदी भी थीं। बरामदे को एक किनारे दीवार बनाकर ढक दिया गया था। बुआ सरदी और बरसात वहीं सोतीं। बताने लगीं कि इधर काफी दिनों से कमली की माँ आजाती थी, लेकिन अमिता के आने के बाद कमली सोने लगी। उनक बिस्तर वहीं लगा था।

कुछ देर बाद लाइट चली गयी। अमिता दी उठकर बिस्तर पर बैठ गयीं। वह चुप थीं। यद्यपि उन्होंने मुझसे दिन में वह पढ़ाई-लिखाई की थीं। इधर आग के पास औरतों की गप चल रही थी मै उठकर सोने के लिए बाहर बैठक में जाने लगा तो बुआ ने ही रोक लिया। जाना कहकर।

वास्तव में उन्होंने अभी तक अपने पीहर की तो बात ही नहीं की थी। उनके कहने पर मैं भी वहीं जाकर चारपाई पर दूसरी तरफ रजाई ओढ़कर बैठ गया। अमिता दी पीठ को दीवार से टिकाये बैठी हुई औरतों के प्रस्नों का उत्तर हाँ-न में दे रही थीं।

मैंने पैर फैलाये तो मेरे पैरों का पंजा उनकी जांघों से छू गया। मैंने उन्हें खींचकर थोड़ा हटाकर फिर फैलाया तो जाकर उनकी योनि से मेरा अँगूठा लग गया।

असल में उन्होंने अपने दोनों पैरों को इधर उधर करके लम्बा कर रक्खा था। उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

न जाने किस भावना से संचालित होकर मैंने पैरों का दबाव थोड़ा बढ़ा दिया।

इस बार उन्होंने मेरे पैर के अँगूठे को पकड़कर धीरे से हटाया तो वह उनकी एक तरफ की जाघ से लग गया। एक क्षण बाद मैंने फिर पैरों को उसी जगह जान-बूझकर रख दिया।

रजाई के अन्दर ही अमिता दी ने फिर मेरे पैर का अँगूठा पकड़ लिया, लेकिन मैंने जब अपने पैर को वहाँ से हटाना चाहा तो उन्होंने मेरी आशा के विपरीत उसी जगह पर मेरे पैरों को दबाये तेज चिकोटी काटने लगीं।

मैंने उनके चेहरे को देखा तो वह मुस्कुराये जा रही थीं। वह आगे आकर मेरे पंजे को अपनी योनि को और सटाकर मुस्कुराते हुए मेरे पंजे को ऐंठ भी रही थीं।

यद्यपि वह जितना जोर लगा रही थीं मुझे उतनी पीड़ा की अनुभूति नहीं हो रही थी। बल्कि मैं उनकी योनि के भूगोल को परखने में लग गया। संभवता वह शलवार के नीचे चड्डी नहीं पहने थीं। क्योंकि उनके वहाँ के बालों का मुझे पूरा एहसास हो रहा था। निश्चित रूप से उनकी झाँटो के बाल बड़े और घने होंगे।

अधिक कहानियाँ : सपनों की बारात – भाग १

इस अनुभूति से मेरे अन्दर अजीब सी अकड़न होने लगी। वहीं बैठी किसी औरत ने कहा, सो जाओ बबुआ।

हाँ रे ललुआ! बेचारा थका आया है। इसके फूफा की तो अभी बैठक में पंचायत चल रही होगी। कल से इसका बिछौना अन्दर ही लगवाऊँगी।

बुआ ने कहा, गुड्डी जरा किनारे हो जा लल्लू कमर सीधी कर ले। बुआ अमिता को गुड्डी कहती थीं।

न जाने कमली मुझे देखकर मुस्कुराये जा रही थी। बिजली चली गयी थी। गाँव में रहती ही कितनी है! लालटेन के मद्धिम प्रकाश में मैंने अमिता दी के चेहरे को देखने की कोशिश की, लेकिन उनके भावों को समझ नहीं पाया।

वह बिस्तर से उठने लगीं तो बुआ बोलीं, तू क्यों उठ रही है गुड्डी, अभी यह तो चला ही जायेगा। और बाहर की तरफ के कमरे की ओर संकेत करके कहा, आज से मैंने कमली को भी रोक लिया है।

वह थोड़ा सा एक तरफ खिसक कर बैठी रहीं। मैं जाकर उनकी बगल में लेट गया। और दो ही मिनट बाद अन्दर ही हाथ को उनकी जँघों पर रख दिया वह थोड़ा कुनमुनाईं और मेरे हाथों को पकड़ लिया पता नहीं क्यों वहाँ से हटाने के लिए या किसी इशारे के लिए लेकिन मैने उनके हाथों को अपने हाथों में दबोचकर सहलाने लगा। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

फिर मैंने हाथों को अन्दर से ही उनके सीने की तरफ लेजाकर उनके स्वेटर के ऊपर से छू दिया। सीने का ऊपरी हिस्सा रजाई के बाहर था इसलिए जितना अन्दर था उसके स्पर्श का आनन्द मैं लेने लगा।

उनकी चूचियाँ ब्रेसरी मे कसी थीं। वह खाली हिल-डुल ही रही थीं। एकाधबार उन्होंने मेंरा हाथ अपने हाथ से झिटकना चाहा तो मैंने उनके प्रतिरोध को अनदेखा कर दिया। मुझे लगा कि यह उनका दिखावा है।

फिर मैंने नीचे से हाथ को कपड़े के अन्दर से डालकर सीधे हाथों को ब्रेसरी में बंधी छातियों के निचले हिस्से से लगा दिया और जोरभर के सहलाने लगा। मन तो हो रहा था कि हाथों को ऊपर लेजाकर पूरी छातियों को सहलाऊँ, लेकिन भय था कि कहीं कोई देख न ले। मुझे लग रहा था कि कमली संभवतः अनुमान लगा रही है। मैंने महसूस किया कि उनकी चूचियां कड़ी हो रही हैं।

तभी उन्होंने रजाई को खींचकर गले तक ओढ़ लिया। फिर तो मुझे मानों मनचाही वस्तु मिल गयी।

मैंने हाथ निकालकर उनके स्वेटर के बटन खोल दिए और उनकी जम्पर को ऊपर सरकार रजाई के नीचे उनकी चूचियों को खोल दिया उनके ऊपर सिर्फ ब्रेसरी ही रह गयी। और मैं उनकी बदल-बदलकर दोनों छातियों को मलने-दबाने लगा। वह कड़ी ही होती जा रही थीं।

तभी वहाँ बैठी एक औरत बात करते हुए उनकी मम्मी और भाई बहनों का हाल पूछने लगी। वह गड़बड़ाने लगीं। मुझे मजा आने लगा।

मैं और जोर लगाकर उनकी चूचियां मसलने लगा। अनुमान किया तो लगा कि वह देसी पपीते के आकार की हैं। फिर मैंने दूसरे हाथ को पीछे से लेजाकर उनकी ब्रेसरी के हुक को खोल दिया। दुसरे हाथ से आगे से खींचा।

ब्रेसरी ढीली होने के कारण उनकी दोनों चूचियां अब आजाद हो गयी थीं। और मेरी हथेलियों में खेलने लगीं।

तभी मैंने महसूस किया कि उन्होंने मेरी तरफ वाला अपना हाथधीरे से मेरे सीने पर रख दिया। मैंने उनके फैले पैरों को अपने हाथ से खींचकर अपनी टांगों से चिपका लिया।

मैंने लुंगी ही पहन रक्खा था। उसके नीचे चड्डी थी। मेरा खड़ा होकर तन गया लिंग उनकी फिल्लियों से रगड़ने लगा। वह अपने हाथों को मेरे सीने पर फेरने लगीं। यूँ ही लगभगआधे घंटे बीत गये।

मैंने हाथों को उनकी छातियों से हटाकर जब दोंनों टांगों के बीच लेजाकर उनकी झाँटों से आच्छादित योनि पर कपड़े के ऊपर से लगया तो देखा कि वहाँ का कपड़ा गीला है। तभी वहाँ रह गयी अन्तिम दोनों औरतें यह कहते हुए उठ गयीं कि अब ठकुराइन हम सोने जा रहे हैं।

अमिता दी जल्दी से कपड़े सही किये। ब्रेसरी तो खुली ही रह गयी। उठ गयीं। मुझे भी मन मार कर उठना पड़ा। मेरा लंड अभी भी उसी तरह तना था। किसी तरह संभालकर उठा।

बाहर बैठक में ही मेरा बिस्तर बिछा था। वहां अभी भी तीन चार लोग बैठे थे। गप्प चल रही थी। बिस्तर पर रजाई नहीं थी तो मैं अन्दर लेने आया।

अधिक कहानियाँ : घर में ताई की चुदाई

बिस्तर को बक्सा ऊपर छत की कोठरी में था।

बुआ ने बड़बड़ाते हुए कमली से कहा, जाकर निकाल दे। और मुझसे बोलीं, कि तू भी चला जा लालटेन दिखा दे।

आगे-आगे मैं और पीछे कमली, ऊपर पहुँचकर कोठरी का द्वार खोलकर बड़े वाले बक्से का ढक्कन खोलने के लिए वह जैसे ही झुकी मैंने लालटेन जमीन पर रखकर उसे पीछे अपनी बाहों में समेट लिया।

अमिता दीदी के साथ इतनी हरकत के बाद तो मेरी धड़क खुल ही गयी थी। वह चैकी तब तक हाथ को आगे से उसकी लेकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसकी चूचियों को हथेलियों की अँजुरी बनाकर उसे कस लिया और उसके कानों को होंठों मे दबाकर चूसने लगा।

उसने पकड़ से आजाद होने का प्रयत्न किया, लेकिन मैंने इतनी जोर से कसा कि वह हिल भी नहीं सकती थी वह घबराकर बोली, लल्लू भय्या छोड़िये अभी कोई आ जायेगा।

उसकी यह बात सुनकर मेरा मन गदगद हो गया। मैंने उसकी चूची के चने को दो अँगुलियों से छेड़ते हुए कहा, यहाँ कौन आने वाला है! मैं तुम्हारी ले तो रहा नहीं हूँ। बस भींच ही रहा हूँ।

अब तक वह संभवतः अपने ऊपर नियन्त्रण कर चुकी थी। बोली, हाय राम तुम तो बड़े हरामी हो!

जो भी कहो। मैंने उसे झटके अपनी तरफ घुमाकर चप्प से उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर होठों को चूसने लगा और उसकी समीच में हाथ डालकर चूचियों को सीधे स्पर्श करने लगा। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

धीरे-धीरे वह पस्त सी पड़ने लगी। वह मस्ताने लगी। उसकी स्तन के चने खड़े होन लगे। जब उसके मुँह को चूसने के बाद अपने मुँह को हटाया तो मादक स्वर में बोली कि, अब छोड़िये मुझे डर लग रहा है। देर भी हो रही है।

एक वादा करो।

क्या?

देने का!

उसने चंचल स्वर में फिर सवाल किया, क्या?

बुर और क्या!

उसने अँगूठे के संकेत से कहा, ठेंगा।

मैंने हाथ को झटके से नीचे लेजाकर उसकी बुर को दबोचते हुए कहा, ठेंगा नहीं यह! तुम्हारी रानी को माँग रहा हं।

मेरे नीचे से हाथ हटाते ही उसने बक्सा खोलकर रजाई निकालकर कहा, उसका क्या करना है?

चोदना है!

बठाये अपने लंड की ताकत! मालिस और शक्ति वर्धक गोलियों करे चुदाई का मज़ा दुगुना!

वह रजाई को कंधे पर रख लपक कर मेरे लंड को चड्डी के ऊपर से नोचते हुए बोली, अभी तो!

नहीं कल! और वह नीचे चली गयी। मैं भी जाकर बाहर बैठक मैं सोया। फूफा तो खर्राटे भरने लगे, लेकिन मुझे नीद ही नहीं आ रही थी। अन्दर से प्रसन्नता की लहर सी उठ रही थी।

एक साथ दो-दो शिकार! हे राम! फिर दोनों को लेकर तरह-तरह की कल्पनाएं करते हुए न जाने कब नीद आयी।

More from Storyline / श्रृंखला की कहानियां

    दो जवान जिस्मो के साथ छेडखानिया

    गाओं की सर्दी में जवानी की गर्मी – भाग १

    गाओं जाते ही एक जवान लोंदे को एक नहीं दो जवान लड़की के गर्म बदन के साथ खेलने का मौका मिल जाता हे। पढ़िए इस कामुक चुदाई कहानी में।

    अमिता दीदी की कुंवारी चुत चुदाई

    गाओं की सर्दी में जवानी की गर्मी – भाग २

    रात की छेड़खानियों से अमिता दीदी को उसका कर उनसे चुदाई करने का मौका तलाश लिया, पढ़िए कैसे अमिता दीदी की कुंवारी चुत की चुदाई हुए।

Popular Stories / लोकप्रिय कहानियां

  • Papa ki Dulhan Beti – Part 7

    Ghar ke halat sambhal ne Saanya ne casino me dancer ki job le li thi aur Uska baap padoshwali Anjli ko chodne ke firak me tha. Padhiye aage kya hua.

  • सेठ की रंडी बीवी को चोदा

    मेरे सेठ की बीवी एक नंबर की चालू औरत थी, जिसे नए लैंड से चुदना बड़ा पसंद था। पढ़िए कैसे मेने उसे पता कर उसकी चुदाई करी।

  • Girlfriend ne kiya Bimaari ka ilaaj

    Delhi me meri bahen aur unki saheliyon ki group me chudai karke jub me wapis aaya. Tab se mere lund me tez dard ho raha tha. Is kahani me padhiye, Kese meri girlfriend ne mera ilaaj karwaya.

  • Cousin ki Shaadi me Saheli ki Chudai

    Meri behan ki shaadi me aayi uski saheli meri deewani ho gayi Is Indian Adult story me padhiye kaise maine shaadi me behan ki saheli ki chut chodi

  • Anjaan dosti me Biwi ki Chut ka Tohfa – Part 1

    Padhiye ki kaise meri mulakaat Railway platform pe ek anjaan insan Puneet se hoti hai. Jo mera parichay apni biwi Kamini se karata hai. Padhiye kis liye?

Work with us / हमारे साथ काम करें
Earn / कमाएं: ₹40,000 per month
Apply Now / अभी आवेदन करें!