गाओं की सर्दी में जवानी की गर्मी – भाग २

कहानी का पिछला भाग यहाँ पढ़े : गाओं की सर्दी में जवानी की गर्मी – भाग १

कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कैसे मेने अमिता दीदी और कमीली की चूँचियों के साथ खेला था और जवानी की गर्मी के मज़े लिए थे। अब आगे…

जब आँख खुली तो पता चला कि सुबह के नौ बज गये हैं। चड्डी गीली लगी। छूकर देखा तो पता चला कि मैं सपने में झड़ गया था। तभी अमिता दीदी आ गयीं। उन्होंने मेरे उठने के बाद लुगी को थोड़ा सा गीला देखा तो मुस्कुराने लगीं। और धीरे से कहा, यह क्या हो गया।

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मैंने भी उन्ही के स्वर में उत्तर दिया, रात में आपको सपने में चोद रहा था। नाइटफाल हो गया।

वह हाथों से मारने का संकेत करते हुए निगाहें तरेरते अन्दर चली गयीं। सर्दी तो थी लेकिन धूप निकल आई थी।

पता चला कि कमली कामों को निपटाकर अपने बाप के साथ अपने खेतों पर चली गयी। मैं नित्य क्रिया से निपटकर चाय पीने के बाद नाश्ता कर रहा था तो पास में ही आकर अमिता दीदी बैठ गयीं। दूसरी तरफ रसोई में चूल्हे पर बैठी बुआ पूरी उतार रही थीं। वहीं से बोलीं, अमिता तूं नहा धोकर तैयार हो जा। चलना बालेष्वर मन्दिर आज स्नान है। महीने का दूसरा सोमवार है।

वह जवाब देतीं उससे पहले ही मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा, प्लीज अमिता दीदी न जाइए। कोई बहाना बना दीजिए।

क्यों धीरे से मुस्कुराकर कहा।

मेरा मन बहुत हो रहा है।

क्या?

मैंने झुँझलाकर कहा, तुम्हें लेने का!

मैं दे दूँगी!

हाँ! आप को जाना नहीं है।

तब वह बोलीं, मामी मेरी तबियत ठीक नहीं।

अकेले कैसे रहेगी।

लल्लू तो है न!

वह रुकने वाला है घर में!

हाँ बुआ मैं तो चला घूमने। मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा।

मामी! फिर वह धीरे से बोलीं, तो मै जाऊँ!

प्लीज.प्लीज नहीं।

चुपकर रे ललुआ! कहाँ गाँव भागा जा रहा है! मैं बारह बजे तक तो आ ही जाऊँगी तेरे फूफा तो निकल गये शहर। कमली का बाबू का आज गन्ना कट रहा है नहीं तो मैं उसे ही रोक देती। मैं रात से ही देख रही हूँ इसकी तबियत ठीक नहीं देर तक सोई नहीं। बुआ ने कहा। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

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और अन्तिम पूरी कड़ाही से निकालकर आँच को चूल्हे के अन्दर से खीच कर उठ गयीं।

बुआ के जाते ही मैंने मुख्य द्वार की सांकल को बन्द किया और और अमिता दीदी का हाथ पकड़कर कमरे में लेगया। बिजली थी। बल्ब जलाकर उन्हें लिपटा लिया। उन्होंने अपना चश्मा उतार कर एक तरफ रख दिया।

वह भी सहयोग करने लगीं। मेरे मुंह से मुंह लगाकर मेरी जीभ चूसने लगीं। मैं उनके चूतड़ों की फांक में अंगुली धंसा कर उन्हे दबाने लगा।

मेंरा मुंह उनके थूक से भर गया। मेरा शरीर तनने लगा। वह चारपाई पर बैठ गयीं। मैंने उनकी समीच को उतरना चाहा तो बोलीं, नहीं ऊपर कर लो।

मजा नहीं आयेगा। कहते हुए मैंने हाथों को ऊपर करके समीज उतार दी। ब्रेसरी में कसी उनकी छोटे खरबूजे के आकार की चूचियां सामने आ गयीं।

फिर मैंने थोड़ी देर उन्हें ऊपर से सहलाने के बाद ब्रेजरी खोलना चाहा, तो उन्होंने खुद ही पीछे से हुक खोल दिया। बल्ल से उनकी दोनों गोरी-गोरी चूचियां बाहर आ गयीं। चने गुलाबी थे। थोड़ी सी नीचे की तरफ ढलकी थीं। मैं झट से पीछे जाकर टांगे उनके कमर के दोनों तरफ करके बैठ गया। और आगे से हाथ ले जाकर उनकी चूचियां मलने लगा। चने खड़े हो गये।

उन्हें दो अंगुलियों के बीच में लेकर छेड़ने बहुत मजा आ रहा था। मेरा पूरी तरह खड़ा हो गया लिंग उनकी कमर में धंस रहा था। वह बोलीं, पीछे से क्या धंस रहा है. अब इससे आगे नहीं!

उनको अनसुना करके मैंने अपनी लुंगी खोल दी नीचे कुछ नहीं था। चारपाई से उतर कर उनके सामने आ गया।

मेरे पेड़ू पर काली-काली झांटे थीं। पेल्हर नीचे लटक रहा था। चमड़े से ढका लाल सुपाड़ा बाहर निकल आया। उसे उनकी नाक के पास हिलाते हुए कहा, अमिता दीदी इसे पकड़ो।

उन्होंने लजाते हुए उसे पकड़ा और सहलाने लगीं। थोड़ी ही देर में लगा कि मैं झड़ जाऊंगगा। मैंने तुरन्त उनकी पीठपर हाथ रखकर उन्हें चित कर दिया और हाथ को द्यालवार के नारे पर रख दिया। वह बोलीं, नहीं।

मैंने उनकी बात नहीं सुनी और और उसके छोर को ढूंढने लगा। वह बोलीं, आगे न बढ़ों मुझे डर लग रहा है। मैंने नारे का छोर ढूंढ लिया।

वह फिर बोलीं, अगर कहीं बच्चा ठहर गया तो। आज नहीं कल निरोध लाना।

बुर मे नहीं झड़ूंगा। कसम से । मैंने कहा।

लल्लू मुझे डर लग रहा सच! यह मैं पहली बार करवा रही हूं।

मैं भी। इसी के साथ मैंने उनका नारा ढीला कर दिया और दूसरे हाथ से उनकी चूचियां मले जा रहा था। वह ढीली पड़ती जा रही थीं। कुछ नहीं होगा। कहकर मैंने सर्र से उनकी शलवार खींच दी। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

नीचे वह चड्डी नहीं पहने थीं। उनकी बुर मेरे सामने आ गयीं। उन्होंने लज्जा से आं बंद कर लीं। उनका पेड़ू भी काली झांटों से भरा था।

मैंने ध्यान से देखा तो उनकी बुर का चना यानी क्लीटोरिस रक्त से भरकर उभर गया दिखा। मैं सहलाने के लिए हाथ ले गया तो वह हल्का से प्रतिरोध करने लगीं, लेकिन वह ऊपरी था।

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मुझसे अब बरदास्त नहीं हो रहाथा। मैंनें जांघे फैला दी और उनके बीच में आ गया। फिर अमिता दीदी के ऊपर चढ़कर हाथों से लन्ड पकड़कर उनकी बुर के छेद पर रक्खा और दबाव दिया तो सक से मेरा लन्ड अन्दर चला गया।

निशाना ठीक था। उन्होंनं सिसकारी भरी। और धीरे से कहा, झिल्ली फट गयी।

मैं कमर उठाकर हचर-हचर चोदने लगा।

उन्होंने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे चेहरे पर अपने मुंह को रगड़ने लगीं। उनका गोरा नरम शरीर मेरे सांवले थोड़ा भारी शरीर से दबा पिस रहा था। थोड़ी देर बाद उनकी बुर से पुच्च-पुच्च का स्वर निकलने लगा।

मैं झड़ने को हुआ तो झट से लन्ड को निकाल दिया ओर भल्ल से वीर्य फेंक दिया। सारा वीर्य उनके शरीर पर गिर गया।

थोड़ी देर बाद वह उठ गयीं ओर वैसे ही कपड़े पहनने लगीं। मैंने कहा, एक बार और।

नहीं!

अब कब?

कभी नहीं।

यह पाप है!

पाप नहीं मेरा लन्ड है। मैंने इस तरह कहा कि, वह मुस्करा उठीं और कपड़े पहनने के बाद कहा, लल्लू सच बताओ इससे पहले किसी की लिए हो?

कभी नहीं। बस चूची दबाई है। वह भी यहीं।

किसकी। उन्होंने आंखें खोलकर पूछा।

कमली की।

कब।

रात जब हम लोग ऊपर गये थे।

तुम पहुँचे हो! वह बोलीं और बाहर निकल गयीं।

दोपहर तक बुआ क आने से पहले हम दोनों चूत बुर और लन्ड की बातें करते-करते इतने खुल गये कि मैंने तो सोचा भी नहीं था।

उन्होंनं बताया कि उनके चाचा के लड़के ने कई बार जब वह सोलह की थीं तो चोदने की कोशिश की लेकिन अवसर नहीं दिया।

लेकिन मैंने रात में उनकी भावनाओं को जगा दिया और अच्छा ही किया। क्यों की अभी तक वह इस स्वर्गीय आन्नद से वंचित थीं। चुदाई के बाद हम लोगों ने मुख्य द्वार तुरन्त ही खोल दिया, तभी पड़ोस की एक औरत आ गयीं। आप यह गाओं की जवान लड़कियों की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे।

वह थोड़ी देर बैठी रहीं। मैं धूप में नहाने बाहर नल पर चला गया।

वह भी जब नहाकर आयीं तो बारह बनजे में आधे घंटे रह गये थे। इसका अर्थ था बुआ बस आने वाली होंगीं। मैंनें एक बार ओर चोदने के लिए कहा तो वह नहीं मानी, लेकिन मेरे जिद करने पर ठीक से वह अपनी बुर दिखाने के लिए तैयार हो गयीं। बुर को खोल दिया। चुदाई के कारण अभी तक उनकी बुर हल्की सी उठी थी।

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मैंने झांट साफ करने के लिए कहा तो हंसकर टाल गयीं। उन्होंने मेरा लन्ड भी खोलकर देखा। वह सिकुड़कर छुहारा हो रहा था। लेकिन उनके स्पर्श से थोड़ी सी जान आने लगी तो वह पीछे हट गयीं, और बोलीं कि, अब बाद में अभी यह फिर तैयार हो गया तो मेंरा मन भी तो नहीं मानेगा!

दोपहर में बुआ के साथ ही कमली भी आयी। वह हमे देखकर अकारण मुस्कुराये जा रही थी। मैं गाँव घूमकर तीन बजे आया तो बाहरी बैठक में लेट गया। वह धीरे से आकर बोली, आज तो अकेले थे, लल्लू भय्या अमिता दीदी को लिया तो होगा।

तूने दे दिया कि वह देंगी ! बता न कब देगी और कहाँ, कहकर मैंने इधर उधर देखकर उसे वहीं बिस्तर पर गिरा दिया चढ़ बैठा और लगा उसकी चूचियां कपड़े के ऊपर से मीजने, वह भी मुझे नोच रही थी। तभी न जाने कैसे वहां अमिता दी आ गयीं। चूंकि मकली नीचे थी इसलिए उसने उन्हें पहले देखा वह नीचे निकलकर भागने का प्रयत्न करने लगी।

मैं ओर तेजी से उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे दबाने लगा तो वह घबराये स्वर में बोली, अमिता दीदी! मैंने मुडकर देख तो न जाने क्यों मुझे हंसी आ गयी। मनही में सोचा चली अच्छा हुआ। लेकिन मैंने घबराने का बहाना करके कहा, अमिता दी किसी से कहना नहीं।

वह हक्की बक्की हो गयीं। मैंने आंख मारी तो समझ गयीं। तब तक हम दोनो अलग हो गये थे। वह आंखे नीचे झुकाकर खड़ी हो गयी और बोली, लल्लू भय्या जबरदस्ती कर रहे थे।

मैं एक शर्तपर किसी से नहीं कहूँगी। वह मुझसे भी उतावली के साथ बोली। हां!

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जो मैं कहूंगी करना होगा। तुम मेरे सामने लल्लू से करवाओगी।

मुझे तो इसकी आषा भी नहीं थी। मैंने सिर झुकाकर हामी भर दी, वह भी हल्का सा मुस्कुराई।

हम लोग अन्दर आ गये। कमली काम में लग गयी। अमिता दी ने अवसर मिलते ही धीरे से कहा, इसको भी मिला लेंगे तो मजा भी आयेगा और डर भी नहीं रहेगा।

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