विधवा भाभी की चुदाई-3

हेलो दोस्तों, कहानी के पहले दो भाग में आपने पढ़ा, कैसे मेने अपनी विधवा भाभी को चोदा। और उनसे एक कुंवारी चुत दिलवाने की शर्त पे शादी भी करी।  भाभी ने अपने वादे के मुताबिक मेरे लिए एक कुंवारी चूत का इंतेज़्ज़म कर दिया. मेने भी वो नाज़ुक कली को अपना लंड दिखा कर उपसना चालू कर दिया. क्या में उसे मनाने में सफल हुआ?

जाने के लिए, कहानी का पिछला भाग जरूर पढ़ियेगा – विधवा भाभी की चुदाई-2

अब आगे…

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इतना कह कर लाली खड़ी हो गई और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये। ॠतु मुझे देख कर मुसकुराने लगी, तो मैं भी मुसकुरा दिया। लाली बेड पर लेट गई तो मैं लाली के पैरों के बीच आ गया। मैंने उसके पैरों को एकदम दूर दूर फैला दिया। उसके बाद मैंने अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत पर रगड़ना शुरु कर दिया। वो जोश के मारे पागल सी होने लगी और जोर जोर की सिसकारियां भरते हुये बोली – जीजू, बहुत मज़ा आ रहा है, और जोर से रगड़ो।

मैंने और ज्यादा तेजी के साथ रगड़ना शुरु कर दिया, तो 2-3 मिनट में ही लाली जोर जोर की सिसकारियां भरने लगी और झड़ गई।

लाली की चूत अब एकदम गीली हो चुकी थी, इसलिये मैंने अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा। मैंने उसकी चूत के होंठ को फैला कर अपने लण्ड का सुपाड़ा बीच में रख दिया। उसके बाद जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो वो चीख उठी और बोली – जीजू, बहुत दर्द हो रहा है, बाहर निकाल लो।

मैंने कहा – बस थोड़ा सा बरदाश्त करो।

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चुका था। मैंने फिर से थोड़ा सा जोर लगाया तो इस बार वो जोर जोर से चीखने लगी। उसने रोना शुरु कर दिया तो ॠतु ने उसे चुप करते हुये कहा – दर्द को बरदाश्त कर, तभी तो तू मज़ा ले पायेगी।

वो बोली – बहुत तेज दर्द हो रहा है, दीदी।

ॠतु उसका सिर सहलाने लगी तो थोड़ी ही देर में वो शान्त हो गई।

मेरा लण्ड इस उसकी चूत में 2″ तक घुस चुका था। जब लाली चुप हो गई, तो मैंने फिर से जोर लगाया तो मेरा लण्ड थोड़ा सा और घुस गया और उसकी सील मेरे लण्ड के रास्ते में आ गई। वो फिर से चीखने लगी और बोली – जीजू, बाहर निकल लो, मैं मर जाऊंगी… बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फट जायेगी।

मैंने उसकी चूचियों को मसलते हुये कहा – बस थोड़ा सा ही और है।

थोड़ी देर तक मैं उसकी चूचियों को मसलता रहा और उसे चूमता रहा तो वो शान्त हो गई। मुझे अब उसकी सील को फ़ाड़ना था।

मैंने लाली की कमर को जोर से पकड़ लिया पूरी ताकत के साथ बहुत ही जोर का धक्का मारा। उसकी चूत से खून निकलाने लगा। मेरा लण्ड उसकी सील को फ़ाड़ते हुये 4″ से थोड़ा ज्यादा अन्दर घुस गया। लाली इस बार कुछ ज्यादा ही जोर जोर से चिल्लाने लगी, तो ॠतु ने उसे चुप करते हुये कहा – बस हो गया, अब रो मत। अब दर्द नहीं होगा, केवल मज़ा आयेगा।

वो बोली – क्या पूरा अन्दर घुस गया?

ॠतु ने कहा – अभी कहाँ, अभी तो आधा ही घुसा है।

वो बोली – जब जीजू बाकी का घुसायेंगे तो मुझे फिर से दर्द होगा।

ॠतु ने कहा – नहीं, अब दर्द नहीं होगा, अब तुझे मज़ा आयेगा।

लाली जब शान्त हो गई, तो मैंने धीरे धीरे उसकी चुदाई शुरु कर दी। उसे अभी भी दर्द हो रहा था और वो आहें भर रही थी। उसकी चूत बहुत ही ज्यादा कसी थी इसलिये मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में अन्दर-बाहर नहीं हो पा रहा था। मैं उसे चोदता रहा तो वो कुछ देर बाद वो धीरे धीरे शान्त हो गई। अब उसे भी कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। उसने सिसकारियां भरनी शुरु कर दी। ॠतु ने पूछा – अब कैसा लग रहा है?

वो बोली – अब तो मज़ा आ रहा है।

ॠतु ने कहा – पूरा अन्दर घुस जाने दे तब तुझे और मज़ा आयेगा, यह तो अभी शुरुआत है।

मैंने उसे चोदना जारी रखा, तो थोड़ी ही देर बाद उसने अपना चूतड़ भी उठाना शुरु कर दिया।

थोड़ी देर की चुदाई के बाद लाली झड़ गई। उसकी चूत और मेरा लण्ड अब एकदम गीला हो चुका था। मैंने अपनी स्पीड धीरे धीरे बढ़ानी शुरू कर दी। लाली पूरे जोश में आ चुकी थी। वो जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी। मैंने हर 4-6 धक्के के बाद एक धक्का थोड़ा जोर से लगाना शुरु कर दिया। इससे मेरा लण्ड थोड़ा थोड़ा कर के उसकी चूत में और ज्यादा गहराई तक घुसने लगा। जब मैं तेज धक्का लगा देता था तो लाली केवल एक आह सी भरती थी। वो इतने जोश में आ चुकी थी कि उसे अब ज्यादा दर्द महसूस नहीं हो रहा था। मैं इसी तरह से उसे चोदता रहा।

थोड़ी देर की चुदाई के बाद ही लाली फिर से झड़ गई। अब तक मेरा लण्ड उसकी चूत में 7″ अन्दर घुस चुका था। मैंने अपनी स्पीड बढाते हुये उसकी चुदाई जारी रखी। थोड़ी ही देर में मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में समा गया। ॠतु ने जब देखा कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस चुका है तो उसने लाली से कहा – इनका पूरा का पूरा लण्ड तेरी चूत के अन्दर घुस गया है। अब तुझे केवल मज़ा आयेगा।

वो बोली – मुझे विश्वास नहीं हो रहा है।

ॠतु ने कहा – अगर तुझे विशवास नहीं हो रहा है तो हाथ लगा कर देख ले।

लाली ने हाथ लगा कर देखा तो बोली – दीदी, यह पूरा अन्दर कैसे घुस गया? मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला।

ॠतु ने कहा – जब तू थोड़ी देर की चुदाई के बाद पूरे जोश में आ गई थी, तब ये बीच बीच में जोर का धक्का लगा देते थे। इससे इनका लण्ड थोड़ा थोड़ा कर के तेरी चूत के अन्दर घुसा जाता था। तू जोश में थी इस लिये तुझे कुछ पता ही नहीं चला।

मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी क्योंकि अब मैं झड़ने वाला था। 2 मिनट के अन्दर ही मैं झड़ गया तो लाली भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गई। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकल कर लाली से पूछा – चाटोगी?

उसने मेरा लण्ड देखा तो उस पर रस के साथ थोड़ा खून भी लगा हुआ था। वो बोली – जीजू, इस पर तो खून भी लगा हुआ है। मैं अगली बार चाट लूंगी।

ॠतु ने कहा – तेरी चूत का ही तो खून है और यह पहली पहली बार निकला है, चाट ले इसे।

वो बोली – तुम कहते हो तो मैं चाट लेटी हूँ।

उसने मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

ॠतु ने पूछा – चुदवाने में मज़ा आया?

वो बोली – हाँ, मज़ा तो आया लेकिन ज्यादा नहीं।

ॠतु ने पूछा – क्यों?

वो बोली – जब मुझे ज्यादा मज़ा आना शुरु हुआ तो जीजू झड़ गये।

ॠतु ने कहा – अगली बार ज्यादा मज़ा आयेगा। इस बार तो इनका सारा समय तेरी चूत में रास्ता बनने में ही लग गया।

मैं लाली के बगल में लेट गया। वो मेरी पीठ को सहलाते हुये मुझे चूमती रही। 10 मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने लाली को डॉगी स्टाईल में कर दिया और उसकी चुदाई शुरु कर दी। उसे इस बार चुदवाने में ज्यादा मज़ा आया और मुझे भी। उसने इस बार पूरी मस्ती के साथ खूब जम कर चुदवाया। मैंने भी उसे पूरे जोश के साथ बहुत ही जोर जोर के धक्के लगाते हुये खूब जम कर चोदा। इस बार मैंने लगभग 35 मिनट तक उसकी चुदाई की। लाली इस दौरान 4 बार झड़ गई थी।

मैं लाली के बगल में लेट गया। हम सब आपस में बातें करते रहे। लगभग 1 घण्टे के बाद ॠतु ने मुझसे कहा – क्यों जी, तुम मुझे आज नहीं चोदोगे क्या? साली की कुंवारी चूत का मज़ा पाकर मुझे भूल गये क्या?

मैंने कहा – भला मैं तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ, तुम तो मेरी बीवी हो। मैं रोज रोज घर का ही तो खाना खाता हूँ। कभी कभी होटल के खाने का मज़ा भी ले लेना चाहिये। तुम तो मेरे लिये घर का खाना हो और लाली होटल का। आज मैंने कुंवारी चूत का मज़ा लिया है इस लिये मैं तुम्हारी चूत को आज हाथ भी नहीं लगाऊगा। आज तो मैं तुम्हारी गाण्ड मारूंगा।

ॠतु बोली – फिर मारो ना।

लाली बोली – जीजू क्या कह रहे हो?

मैंने कहा – ठीक ही कह रहा हूँ। यह कभी कभी मुझसे गाण्ड भी मरवाती है। गाण्ड मरवाने में भी खूब मज़ा आता है। तुम भी मरवाओगी?

वो बोली – पहले आप दीदी की गाण्ड मार लो। जरा मैं भी तो देखूँ कि दीदी आपका इतना लमबा और मोटा लण्ड अपनी गाण्ड के अन्दर कैसे लेती है!

ॠतु घोड़ी बन गई तो मैंने ॠतु की गाण्ड मारनी शुरु कर दी। लाली आंखे फ़ाड़े मेरे लण्ड को ॠतु की गाण्ड में अन्दर बाहर होते हुये देखती रही। मैं 2 बार लाली की चुदाई कर चुका था इस लिये मैं जल्दी झड़ नहीं पा रहा था। ॠतु सिसकारियां भरते हुये मुझसे गाण्ड मरवा रही थी। लाली ॠतु को गाण्ड मरवाते हुये देख रही थी। उसकी आंखो में भी जोश की झलक साफ़ दिख रही थी। मैंने लाली से पूछा – कैसा लग रहा है?

वो बोली – बहुत ही अच्छा लग रहा है, जीजू।

मैंने पूछा – गाण्ड मरवाओगी?

वो बोली – फिर से दर्द होगा।

मैंने कहा – गाण्ड मरवाने में तो बहुत ही ज्यादा दर्द होता है।

वो बोली – ना बाबा ना, मैं गाण्ड नहीं मरवाऊँगी।

ॠतु ने कहा – लाली, पहले तू खूब जम कर इनसे चुदवाने का मज़ा ले ले। उसके बाद एक बार गाण्ड भी मरवाने का मज़ा भी ले लेना।

मैंने लगभग 45 मिनट तक ॠतु की गाण्ड मारी और झड़ गया।

मैंने कई दिनों तक लाली को खूब जम कर चोदा। उसे अब चुदवाने में बहुत मज़ा आने लगा था। मुझे भी कुंवारी चूत को चोदने का मज़ा मिल चुका था और मैं अब उसकी एकदम टाईट चूत को चोद रहा था। मैं लाली की गाण्ड भी मारना चहता था लेकिन उसे मैं खूब तड़पा तड़पा कर उसकी गाण्ड मारना चहता था। मैंने कई बार लाली के सामने ॠतु की गाण्ड मारी तो एक दिन वो अपने आप को रोक नहीं पाई। वो मुझसे कहने लगी – जीजू, एक बार मेरी भी गाण्ड मार लो, मैं भी गाण्ड मरवाने का मज़ा लेना चाहती हूँ।

मैंने कहा – तुझे बहुत ज्यादा तकलीफ़ होगी।

वो बोली – होने दो।

मैंने उससे कहा – तू नहीं जानती है कि मैंने ॠतु की गाण्ड पहली पहली बार कैसे मारी थी?

वो बोली – बताओगे तभी तो जानूंगी।

मैंने कहा – तो सुन, तूने वो पिल्लर देखा है ना जो आंगन में है।

वो बोली – हाँ, देखा है।

मैंने कहा – मैंने ॠतु को खड़ा करके उसी पिल्लर में कस कर बांध दिया था। उसके बाद मैंने इसके मुँह में कपड़ा ठूंस कर इसका मुँह भी बन्द कर दिया था जिससे यह ज्यादा चिल्ला ना सके। उसके बाद ही मैं ॠतु की गाण्ड मार पाया था। गाण्ड में लण्ड आसानी से नहीं घुसता है, बहुत मेहनत करनी पड़ती है और दर्द भी बहुत होता है। गाण्ड से बहुत ज्यादा खून भी निकलता है।

वो बोली – चाहे जो भी हो आप मेरी गाण्ड मार दो, मैं कुछ नहीं जानती।

मैंने कहा – तू कई दिनों तक बिस्तर पर से उठ भी नहीं पायेगी।

वो बोली – जब दीदी ने आप से गाण्ड मरवा लिया तो मैं क्यों नहीं मरवा सकती।

मैंने कहा – सोच ले, बहुत दर्द होगा। तेरी गाण्ड भी फट सकती है।

वो ज़िद करने लगी, मैं कुछ नहीं जानती, तुम मेरी गाण्ड मार दो बस।

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मैंने कहा – अच्छा, कल मैं तेरी गाण्ड मार दूंगा।

वो बोली – नहीं आज ही और अभी मेरी गाण्ड मार दो।

ॠतु मेरी बात सुनकर मुस्कुरा रही थी। वो जानती थी कि मैं झूठ बोल रहा हूँ। वो यह भी समझ गई थी मैं उसकी गाण्ड को बहुत ही बुरी तरह से मारना चाहता हूँ।

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