बारिश में जवान चाची की चुदाई

वक़्त इंसान से कुछ भी करवा सकता है! इस बात का अंदाजा मुझे अभी कुछ दिनों पहले ही हुआ है!

मैं तेईस वर्षीय युवक हूँ। अविवाहित हूँ तो शायद इसीलिए दिमाग में हमेशा एक ही चीज़ रहती है – सेक्स।

मैं सतरह साल का था जब मेरे सबसे छोटे चाचा की शादी हुई! मुझे शायद इस शादी से कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मेरी चाची इतनी ख़ूबसूरत और गठीली न होती! उनके आते ही सारे परिवार में उनकी खूबसूरती के चर्चे तेजी से फैलनें लगे थे।

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मुझे आज भी याद है कि कैसे मैं उन्हें देखकर उनके बारे में सोचता रहता था ‘किस तरह मैं उनका चुम्बन करूँगा। वो बिना कपड़ों के कैसी लगेंगी। अगर मैं उनकी नंगी कमर पर हाथ रखूँगा तो वो क्या करेंगी।’ वगैरा वगैरा… इन्हीं सब ख्यालात के साथ मैं हमेशा चाची क बारे में सोचता रहता था। इन सभी बातों को अब काफी अरसा बीत चुका है और इस दौरान चाची की ज़िन्दगी में कुछ ऐसा हो गया जो नहीं होना चाहिए था। इतनी ख़ूबसूरत बीवी मिलनें के बावजूद चाचा किसी और के चक्कर में लग गए और चाची और अपनी छोटी बेटी को छोड़कर चले गए। यह बात कुछ महीनें पहले की ही है।

यह सब होनें के बाद चाची और उनकी बेटी की ज़िम्मेदारी मेरे पापा नें उठाई और उन्हें अपनें साथ रहनें के लिए कहा। चाची जी को हमारे घर का ऊपर वाला कमरा दे दिया गया। इस दौरान कभी मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं आया कि मैं चाची के साथ ऐसा कुछ करूँ। लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में बहुत तेज़ बारिश हुई। आप यह जवान चाची की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे। पापा बिज़नेंस के काम से बाहर गए हुए थे और माँ भी नानी के घर पर थी। चाची की बेटी भी स्कूल में थी!

ऐसे में मैं घर पर अकेला था। न जानें क्यूँ मेरा दिल हुआ कि आज बारिश में नहाया जाए!

मैं नहानें के छत पर पहुंचा तो देखा चाची भी बारिश के मज़े ले रही थी। न जानें क्यूँ मेरी नज़र उनके पेट पर गई। जो कि कपड़े गीले होनें बाद साफ़ नज़र आ रहा था। शायद मेरे ख़यालात थोड़े बदल से रहे थे।

मुझे देखते ही चाची नें अपनें आपको थोड़ा संभाला और कहा – काफी दिनों बाद इतनी अच्छी बारिश हुई है!

मैंनें पूछा – आपको शायद बहुत अच्छा लगता है बारिश में नहाना।

तो उन्होंनें कहा – हाँ नहाना भी। बारिश में नाचना भी।

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इस बात पर मैंनें हंसते हुए बारिश का कुछ पानी उनके मुँह पर फैंका, तो उन्होंनें भी बदला लेनें के लिए ऐसा ही किया। देखते ही देखते हम दोनों एक दूसरे के साथ बारिश में ही खेलनें लगे। फिर ना जानें कैसे अचानक चाची का पाँव फिसला और वो सीधी मेरे ऊपर आकर गिरी। उन्हें गिरनें से बचानें के लिए मैंनें अपनें दोनों हाथों से उन्हें पकड़ना चाहा, तो मेरे हाथ उनकी कमर पर रुके, लेकिन हम दोनों ही नीचे गिर पड़े! चाची मेरे ऊपर थी और मेरे हाथ उनकी कमर पर। वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल लम्हा था। पता नहीं क्यूँ मेरे हाथों नें कमर पर से हटनें की बजाय अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली! हम दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों में ही देख रहे थे और मुझे उन आँखों में कोई रुकावट नज़र नहीं आ रही थी! शायद इसीलिए मैंनें उनकी नंगी गर्दन पर चूम लिया।

वो थोड़ा घबराई और उठनें की कोशिश करनें लगी। मगर मेरी पकड़ काफी मजबूत थी। मैंनें एक करवट ली और अब मैं उनके ऊपर था। यह सब कुछ खुली छत पर तेज़ बारिश में हो रहा था। बारिश का पानी हम दोनों के बदन को गीला कर चुका था। लेकिन तब भी मैं उनके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था! मेरी आँखें उनकी आँखों में ही देख रही थी। मेरे हाथ उनके दोनों हाथों को संभाले हुए थे। मेरे पैर उनके पैरों में लिपटे हुए थे। हम दोनों के बदन एक दूसरे से सटे हुए थे!

मैंनें उन्हें और चूमना शुरू किया। उनकी गर्दन पर, उनके होठों पर… अब उनका ऐतराज़ करना भी बंद हो चुका था। लेकिन वो खामोश ही थी! मेरे हाथों नें उनके बदन पर चलना शुरू किया। मेरा एक हाथ उनके पेट पर था और दूसरा उनकी गर्दन पर। तभी मैंनें अपनें हाथ से उनकी सलवार के कमरबंद को ढीला कर दिया और उनकी सलवार को बदन से अलग कर दिया। उनकी केले जैसी चिकनी जांघ देखकर मैं पागल सा होनें लगा था। मैंनें उन्हें चूमना शुरू कर दिया और तभी मैंनें चाची की पहली कराह सुनी – आआआ अह्ह्ह्ह।

वो अपनें हाथ से मेरे सिर को पीछे धकेलनें लगी। मैंनें दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया! अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामनें था, जिसके लिए मैंनें हजारों मन्नत की थी। चाची का गोरा चिकना गठीला बदन मेरी आँखों के सामनें था और वो भी उस हालत में जिसमें मैं सिर्फ सोच सकता था। उन्होंनें अपनी आँखों को बंद कर लिया!

उन्होंनें काली ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी। जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी। मैंनें उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबानें लगा। अब शायद उन्हें आजाद करनें का समय आ गया था। मैंनें उनकी ब्रा का हुक खोल कर उन्हें भी आजाद कर दिया। उनकी चूचियों को देखकर मैं मदहोश सा हो रहा था। मैंनें उन्हें चूसना शुरू किया तो चाची सिसक उठी। आप यह जवान चाची की चुदाई कहानी इंडियन एडल्ट स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हे। उनकी सिसकियाँ अब तेज़ होती जा रही थी। उनकी आआआ आआआह्ह ह्ह्ह आआआ अह्ह्ह सुनकर मुझे एक अलग सी ताक़त मिल रही थी।

मेरे हाथ उनके पूरे बदन पर चल रहे थे। और तभी मैंनें हाथ उनकी पेंटी के अन्दर घुसा दिया और वो जैसे पागल सी हो गई। मेरी एक उंगली नें उनकी पेंटी के अन्दर हरकत शुरू कर दी थी। उनके दोनों हाथ मेरी कमर को खरोंच रहे थे।

अब तक उन्होंनें भी मुझे कपड़ों से अलग कर दिया था और मेरे बदन पर सिर्फ मेरा अंडरवियर ही बचा था!

तभी उन्होंनें अपनें नाज़ुक हाथों से मेरे लण्ड को पकडा और उसे सहलानें लगी। मैं पागल हो रहा था।

यह सभी कुछ हम बारिश में गीली छत पर ही कर रहे थे और मुझे लगा काम को आखिरी अंजाम देनें के लिए हमे बेड पर जाना ही पड़ेगा।

मैंनें चाची को उसी हालत में उठाया और अंदर उनके कमरे के बेड पर लिटा दिया। वो बुरी तरह सिसक रही थी। लेटते ही मैंनें उन्हें बुरी तरह चाटना शुरू किया और एक झटके में उनकी पेंटी उतार दी। मैंनें उन्हें जोर से जकड़ लिया।

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उनकी चूचियों को मसलते हुए मैंनें अपना लण्ड उनकी दरार में घुसा दिया। वो थोड़ा सा चिल्लाई, मगर फिर अपनें आपको सँभालते हुए उनके हाथों नें मेरे चूतडों को दबाना शुरू किया!

उनकी इस हरक़त से मुझे काफी जोश मिला और मैंनें झटके लगानें और तेज़ कर दिए। झटके लगाते लगाते वो मुझे काट रही थी। मुझे जकड़ रही थी। सिसकियाँ ले रही थी। मैंनें भी बुरी तरह से उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया।

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वो बिल्कुल पागल हो चुकी थी। बार बार अपनी गांड उचका रही थी।

मैं खड़ा हो गया और उन्हें गोदी में लेकर चोदनें लगा। वो भी उछल उछल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। और लगभग पाँच मिनट बाद मेरा ज्वालामुखी फूटा और उनकी दरार नें भी पानी छोड़ दिया। हम लोग नन्गे बदन काफी देर तक एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे और चूमते रहे।

चाची की चूत चुदाई का यह सिलसला आज भी जारी है।

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